पर्यावरण और जल बचाओ जैसी कई विशेष योजनाओं पर काम कर रहे मेरठ के मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार यहां भी इसे लेकर बेहद गंभीर हैं। कहते हैं कि जहां कानूनों और नियमों का पालन करना उनकी प्राथमिकता है तो वहीं भ्रष्टाचार को खत्म करना लक्ष्य है। साथ बस जनता का चाहिए। खास तौर पर कई घूसखोर अधिकारियों को जेल भिजवाने तक की योजना है। अमर उजाला के मंच पर डा. प्रभात कुमार ने अपनी बेबाक राय पेश की...
प्रोफाइल
डॉ. प्रभात कुमार, 1985 बैच के आईएएस
शिक्षाः
आगरा मेडिकल कालेज से एमबीबीएस, आस्ट्रेलिया से एमबीए, दिल्ली विवि से एलएलबी, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट दिल्ली से पीजी डिप्लोमा इन एनवायरमेंटल लॉ
मूल निवासः मथुरा
परिवार
पत्नीः हिमालिनी प्रभात
प्रिंसिपल इनकम टैक्स कमिश्नर हैं। डा. प्रभात के ही बैच की आईआरएस अधिकारी हैं।
बेटा : शशांक प्रभात
वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन में जेनेवा में कार्यरत हैं
बेटीः गौरी प्रभात
सेंट स्टीफन कालेज दिल्ली से ईको ऑनर में शिक्षारत हैं
यहां रही तैनाती
देहरादून में बतौर एसडीएम पहली तैनाती, मसूरी, मुरादाबाद तथा लखनऊ विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष, नोएडा में डिप्टी सीईओ तथा मुजफ्फरनगर, फतेहपुर तथा कानपुर नगर में डीएम और भारत सरकार में कृषि मंत्रालय में राजनाथ सिंह और चौधरी अजित सिंह के पीएस के रूप में काम किया। इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स में डायरेक्टर रहे। नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार में ज्वाइट सेक्रेटरी तथा उत्तर प्रदेश में कई विभागों के प्रमुख सचिव के रूप में काम किया। यहां से पूर्व दिल्ली में रेजीडेंट कमिश्नर के रूप में तैनात थे और इतने वरिष्ठ हैं कि मुख्य सचिव के ही समकक्ष वेतमान कैटगरी में हैं।
इससे रहे चर्चा में
नोएडा के भूखंड आवंटन घोटाले में यूपी की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव को सजा हुई थी। इसमें बतौर डिप्टी सीईओ डा. प्रभात कुमार ने ही मुख्य रूप से गवाही दी जो नीरा यादव की सजा का आधार बनी। इसके अलावा वीसी रहते समय कई जगह धड़ाधड़ ध्वस्तीकरण कराने से डा. प्रभात चर्चा में रहे।
आपको मेरठ में लगभग एक माह का समय हो गया है। इस अवधि में क्या प्राथमिकताएं तय की हैं और क्षेत्र की किन समस्याओं को चिन्हित किया गया है?
यहां शिकायतों का अंबार है। मतलब साफ है कि संबंधित अधिकारी उनकी शिकायतों का निस्तारण नहीं कर रहे हैं। मैं चिन्हित करूंगा कि सबसे ज्यादा शिकायत कहां से आ रही हैं। उस पर विशेष एक्शन होगा। बिल्डिंग बायलाज के हिसाब से काम और पब्लिक वेलफेयर काम कराने पर विशेष जोर रहेगा।
बिल्डिंग बायलाज पर कैसे काम करा पाएंगे? पूरे शहर में अवैध निर्माणों की भरमार है?
मैंने एमडीए से प्रतिदिन की रिपोर्ट मांगी है। पूरे सौ करोड़ रुपये शमन शुल्क वसूलने का वार्षिक लक्ष्य दिया गया है। विशेष बात यह है कि अवैध निर्माण पर सुनवाई इंजीनियर नहीं करेंगे। प्रशासनिक अधिकारी, मसलन, सचिव, अपर सचिव और वीसी स्वयं सुनवाई करेंगे। काम न करने वालों पर एक्शन होगा।
मंडल में किन समस्याओं पर सबसे गंभीरता से काम करने की तैयारी है?
यहां सबसे बड़ी समस्या गिरते भूजल स्तर की है। मंडल के 46 में से 25 ब्लॉक डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं। इसके लिए मैने जनसहयोग की भी अपील की है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर गंभीरता से काम हो। सरकारी दफ्तरों में इस सिस्टम को लागू किया जाएगा। लेकिन यहां तो उल्टा है। फैक्ट्रियों का दूषित पानी सीधे बोरवेल के जरिए जमीन में उतारा जा रहा है।
हां यह तो है। एनजीटी ने भी जल प्रदूषण के कारण कई सौ हैंडपंप उखड़वाए हैं। इसके लिए विशेष तौर पर हिंडन सफाई अभियान की योजना है। गंगा या नर्मदा की तरह से ही प्लान बने तो बात बने। वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में यह शर्त रहेगी कि पानी ट्रीटमेंट केबाद ही जमीन में डाला जाए। जिन फैक्ट्रियों में यह नहीं हो रहा है वहां एक्शन के लिए टीम बनाई है।
साफ शहरों की सूची में मेरठ गिरकर 339 वें नंबर पर पहुंच गया है। कैसे सुधार होगा
स्वच्छ भारत अभियान में शहर को साफ कराने की पूरी कोशिश है। एमडीए तथा निगम को कहा है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड का पैसा इस पर खर्च करो। कूड़ा निस्तारण, सीवरेज, ड्रेनेज सभी का प्लान है।
ट्रैफिक प्लान लगातार कई बार बना पर शहर जाम से मुक्त नहीं हो पाया।
यहां समस्या अतिक्रमण है। मैने पुलिस, निगम तथा एमडीए अधिकारियों को बुलाकर स्पष्ट कर दिया है कि हर सूरत में स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण हटना ही है। हमारा उद्देश्य यह है कि शहर ऐसा बन जाए कि चौराहों पर ट्रैफिक को सिग्नल कंट्रोल करें करें। सिपाही नहीं। रोडवेज बस अड्डों को भी शहर से बाहर करने पर काम होगा।
सरकारी जमीनों पर कब्जे हैं। अधिकारियों को इससे कोई सरोकार नहीं।
सरकारी जमीनें कब्जा मुक्त होगी। मेरा लोगों से आह्वान है कि किसी भी अधिकारी को रिश्वत न दें बल्कि उन्हें रंगे हाथों रिश्वत देते हुए पकड़वाएं। टीम तैयार है। कई भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भिजवाने की पूरी तैयारी है। बस लोगों को केवल यहां आकर सूचना देनी है।