संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। दूधली खादर गांव में नकली सिगरेट की फैक्टरी पकड़े जाने के एक महीने बाद भी पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। नौ अक्तूबर को आरोपी रवि किशोर की जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी कथित सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और कारोबार के विस्तार को लेकर सवाल बने हुए हैं। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
मुख्य आरोपी रवि किशोर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस, एसओजी और जीएसटी विभाग की टीमें इस सिंडिकेट के अन्य चेहरों, बैंक खातों और अंतरराष्ट्रीय संपर्क सूत्रों (कंबोडिया कनेक्शन) की गहराई से खंगालने में जुटी हैं।
दूधली गांव में छापे के दौरान कथित नकली सिगरेट फैक्टरी का खुलासा हुआ था। जांच के अनुसार, गौशाला की आड़ में संचालित इस ठिकाने पर मशीनों से सिगरेट तैयार करने और उनकी पैकिंग का काम किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकली ब्रांडेड सिगरेट, मशीनें और पैकिंग सामग्री बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
मामले में करीब 10 करोड़ रुपये की मशीनों और अन्य सामान का उल्लेख सामने आया है। इतने बड़े स्तर पर कथित कारोबार संचालित होने के बावजूद नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों और इसकी पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा नहीं होने से जांच पर नजर बनी हुई है।
देश के आधे हिस्से में फैला था नेटवर्क
यह अवैध कारोबार सिर्फ मेरठ या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। दूधली की इस अवैध फैक्टरी में तैयार नकली सिगरेट यूपी, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में सप्लाई की जा रही थी। सीओ पंकज लवानिया का कहना है कि मामले में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
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