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वेस्ट यूपी में सबसे ज्यादा अपराध में लिप्त किशोर

Wed, 01 May 2019 03:29 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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एडीजी प्रशांत कुमार मेरठ जोन - फोटो : अमर उजाला
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 किताबों को हाथों में थामने और कॅरियर पर ध्यान देने की बजाय किशोर जरायम की दुनिया में कदम बढ़ा रहे हैं। वेस्ट यूपी में अपराध के आंकड़ों को देखें तो 14-17 साल की उम्र के किशोर तमंचे, पिस्टल और दिमाग में अपराध की योजना बनाकर घूमते हैं। जेलों और संप्रेक्षण गृह में इसका सर्वे हुआ, जिसमें खुलासा हुआ कि वेस्ट यूपी में सबसे ज्यादा संगीन अपराध करने वाले किशोर हैं। अपराध करने वाला किशोर सुधरने की बजाय बड़ा अपराधी बन जाता है। उक्त अपराधियों पर शिकंजा लगाना भी बेहद मुश्किल होता है। बताया जाता कि वेस्ट यूपी में जमीनी रंजिश, आपसी विवाद, बुरी आदत व टेंशनबाजी या फिर झूठी शान के लिए हत्या हो जाना वेस्ट यूपी में सबसे ज्यादा है। खासतौर पर बताया गया कि वेस्ट यूपी में किशोरों द्वारा सबसे ज्यादा अपराध होना बताया गया। इसका खुलासा वेस्ट यूपी की जिलों से सर्वे के दौरान हुआ। जिसके बाद पुलिस-प्रशासन भी गंभीर हो गया। इसको लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों की कांफ्रेंस हुई है।  
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14-17 साल में ज्यादा अपराध
किशोरावस्था में सोचने व समझने की शक्ति कम होती है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, नोएडा व गाजियाबाद समेत वेस्ट यूपी में 14 से 17 साल की उम्र के किशोरों द्वारा ज्यादा अपराध करना बताया गया। जिम्मेदार लोग पल्ला झाड़ देते हैं कि यह सामाजिक बुराईयां है, इसको खत्म नहीं किया जा सकता। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अभिभावक और टीचरों को कई किशोरों में लक्षण दिखते हैं, लेकिन वह उसको इग्नोर कर देते हैं। बस इसको समझने की जरूरत है। शुरूआत में उसको कंट्रोल किया जा सकता है।
यूरोप की जेलों में हुआ था सर्वे
एसपी क्राइम डॉ. बीपी अशोक के मुताबिक हाल में पुलिस विभाग की ओर से उनको यूरोप की एक सेमिनार में भेजा गया था। जहां पर बताया गया कि यूरोप की जेलों में एक सर्वे हुआ। जिसमें जेल में बंद 70 फीसदी बंदियों में एंटी सोशल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (एएसपीडी) की बीमारी बताई गई। वैज्ञानिकों ने सेमिनार में बताया कि किशोरों में एडीएचडी (एटेंशन डिफिशेट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर) की बीमारी हो जाती है। बाद में किशोरों में यह बीमारी एएसपीडी में बदलती है। जिससे वह गुस्से में अपराध करता है।
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अभिभावक और शिक्षक दें ध्यान  
यूरोप की सेमिनार में बताया कि किशोरों (उम्र 14-17) में एएसपीडी की बीमारी हो जाती है। जिससे किशोर की एक्टिविटी स्कूल और घर में अलग-अलग दिखने लगती है। बेवजह किसी को मारना, धक्का देना या अन्य किशोरों से अलग उनकी एक्टिविटी दिखती है। इस पर सबसे ज्यादा ध्यान किशोर के अभिभावक और टीचर को देने की जरूरत है। ऐसे किशोरों को काउंसिलिंग की जरूरत होती है।  
यह है मेरठ जोन का हाल
जिला                             किशोरों की संख्या                     अपराध         
मेरठ                                     32                                 हत्या, लूट और चोरी
मुजफ्फरनगर                         18                                 हत्या, लूट और चोरी     
शामली                                11                                  हत्या, लूट और चोरी
सहारनपुर                            15                                    हत्या, लूट व चोरी
बागपत                                14                                    हत्या और लूट
बुलंदशहर                            17                                  हत्या, लूट और चोरी
हापुड़                                    09                                 हत्या, रंगदारी व चोरी
नोएडा                                 22                                 हत्या, लूट और चोरी
गाजियाबाद                         17                                हत्या, लूट और चोरी

(किशोर संप्रेक्षण गृह में जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 तक किशोर भेजे गए हैं)
 
खत्म हो रही नाजुकता
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा का कहना है कि अब किशोर अपने माता-पिता के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिताते हैं। वह टीवी, मोबाइल और लैपटॉप पर ज्यादा वक्त बिताते हैं। अपराध करने वाले किशोरों से बातचीत करेंगे तो पता चलेगा कि उन्हें अपराध से संबंधित कार्यक्रम ज्यादा भाते हैं। इससे उनकी नाजुकता खत्म हो जाती है। अपराध करने वाले किशोर एंटी सोशल पर्सनालिटी के शिकार हो जाते हैं। दूसरी तरफ, परिजन भी उन्हें ज्यादा समय नहीं दे पाते हैं। परिजनों को अपने किशोर उम्र के बच्चों से बातचीत करना चाहिए। उनके साथ समय बिताना चाहिए। ज्यादा हस्तक्षेप न करें। लेकिन यह जरूर पता रखें कि उनके बच्चों का फ्रेंड्स सर्किल कैसा है। वह किस तरह के लोगों या किशोरों के संपर्क में रहता है।
बढ़ रही किशोरों की संख्या
किशोरावस्था में अपराध करने वालों की संख्या बढ़ रही है। पुलिस से ज्यादा किशोरों के परिजन और टीचरों को ध्यान देने की जरूरत है। पढ़ाई के दौरान किशोरों की कांउसिलिंग करना जरूरी है। जिससे उनका भविष्य भी सुधरेगा।  -प्रशांत कुमार, एडीजी मेरठ जोन
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