दिगंबर जैन मंदिर में तप और मोक्षकल्याणक, 1180 परिवारों ने किया सामूहिक पूजन
रथयात्रा में दिल्ली समेत कई जिलों से पहुंचे समाज के लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय शांतिनाथ विधान के 25वें दिन रविवार को भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक मनाया गया। 1180 परिवारों ने सामूहिक रूप से विधान कराया। श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक कर निर्वाण लाडू समर्पित किए और भव्य रथयात्रा निकाली गई।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान शांतिनाथ के अभिषेक एवं विशेष पूजन से हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधान में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने निर्वाण लाडू चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं का माला एवं मुकुट पहनाकर सम्मान किया। रथयात्रा में रथ में जैन समाज के धर्म सिद्धांतों का संदेश देती कई आकर्षक झांकियां शामिल हुई। कई प्रसिद्ध बैंड बाजों के बीच रथयात्रा निकाली निकाली गई। लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। रथयात्रा मुख्य मार्गों से होती हुई पांडुक शिला पहुंची, जहां भगवान का अभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना की गई। आसपास मेरठ के अलावा दिल्ली व आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, मेला मंत्री विनय कुमार जैन, शशांक जैन, सुनील जैन, प्रवीण जैन, विजय कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
मनीष जैन बने इंद्र, श्रेयश जैन सारथी
रथयात्रा में ख्वासी बनने का सौभाग्य अशोक जैन (दिल्ली), सारथी बनने का सौभाग्य श्रेयश जैन (दिल्ली), कुबेर इंद्र के रूप में ऋषभ भरत जैन (दिल्ली) तथा इंद्र के रूप में मनीष जैन (दिल्ली) को प्राप्त हुआ। चंवर ढुलाने का सौभाग्य मनीष जैन और प्रदीप जैन (दिल्ली) को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में विनय कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, सुदर्शन जैन, कमल जैन एवं अन्य सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बहुत पवित्र है हस्तिनापुर की भूमि: सौम्य सागर
मंदिर में श्रद्धालुओं को धर्मलाभ देते हुए मुनि श्री 108 सौम्य सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म और तप कल्याणक हस्तिनापुर की पुण्यभूमि पर मनाया जाता है, जबकि उन्होंने सम्मेद शिखर से मोक्ष प्राप्त किया। हस्तिनापुर वह पवित्र भूमि है जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को आहार प्राप्त हुआ और विष्णु कुमार महामुनिराज सहित 700 मुनियों का आगमन हुआ। भगवान शांतिनाथ ने बारह भावनाओं और सोलह कारणों को जीवन में आत्मसात कर तपस्या की और मोक्ष मार्ग का अनुसरण किया। इसी स्मृति में श्रद्धालु निर्वाण लाडू समर्पित करते हैं।
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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में निकाली गई भव्य रथ यात्रा स्रोत संवाद
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में निकाली गई भव्य रथ यात्रा स्रोत संवाद
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में निकाली गई भव्य रथ यात्रा स्रोत संवाद