राष्ट्रीय आम दिवस पर विशेष
- कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने विकसित किया, आम महोत्सव में सीएम ने भी सराहा
मोहित कुमार
मोदीपुरम (मेरठ)। आम भारत का राष्ट्रीय फल है। यह स्वाद, खुशबू और पोषण गुणों के चलते फलों का राजा कहलाता है। उत्तर प्रदेश आम उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। प्रदेश में लगभग 3.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में आम की बागवानी की जाती है। इससे वार्षिक लगभग 60 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, मगर एक साल छोड़कर दूसरे साल फल आना बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने नई प्रजातियां विकसित की हैं, जिससे हर साल उत्पादन होगा और आय भी बढ़ेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत, अमरोहा, सहारनपुर, बुलंदशहर आदि में आम की बागवानी की जाती है। बागपत जनपद की रटौल प्रजाति को वर्ष 2021 में भौगोलिक संकेतक टैग से सम्मानित किया गया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जो बाग है उनमें अधिकांश बागों में आज भी पुरानी प्रजाति के पेड़ हैं, जिन पर एक साल फल आता है और दूसरे साल फल नहीं आता। परंतु, इसके बावजूद पेड़ों की देखरेख के लिए उन पर नियमित रूप से कीटनाशक दवाई का छिड़काव व सिंचाई की जाती है, जिस कारण उत्पादन वाले साल में जो मुनाफा हुआ उसमें से किसान को अगले वर्ष खर्च करना पड़ता है, जिस कारण मुनाफा कम रह जाता है।
नई प्रजातियों से किसानों की भरेगी जेब
आम की बागवानी में एक साल फल और दूसरे साल फल ना आना किसानों के सामने बड़ी समस्या थी, जिस पर वैज्ञानिकों ने शोध शुरू किया, जिससे नई प्रजातियों से किसानों को प्रतिवर्ष आम का उत्पादन मिल सके। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विवि के उद्यान महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 48 प्रजातियों के आमों का संकलन किया, जिसमें स्थानीय चयनित प्रजातियों के साथ भारतीय व विदेशी मूल की उन्नतिशील किस्में भी शामिल हैं। इनमें विशेषकर रंगीन और विशिष्ट प्रजातियां पूसा अरुणिमा, पूसा सूर्या, पूसा श्रेष्ठ, हुख-ए-आरा, मिनी तोता परी, सुनहरी और सुर्ख लाल रंग की किस्में हैं। विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र पर उगाई जा रही विदेशी प्रजातियां सेंसेशन, टॉमी एटकिंस, कटिमॉन आदि भारतीय जलवायु में सफलतापूर्वक विकसित हो रही है और स्थानीय किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने में सक्षम हैं। यह प्रजातियां प्रतिवर्ष आम का उत्पादन देंगी।
वर्जन
गर्मियों में आम लोगों की पहली पसंद होता है लेकिन किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता एक वर्ष फल आना और दूसरे साल फल ना आना है। नई विकसित की गई प्रजातियों से प्रतिवर्ष फल का उत्पादन मिलेगा। इन प्रजातियों के आम का वजन 300 से 400 ग्राम के आस पास तक रहता है, बाजार में इन प्रजातियों की काफी मांग आ रही है। - डॉ. अरविंद कुमार, विभागाध्यक्ष उद्यान महाविद्यालय
किसानों की आय बढ़ाना पहली प्राथमिकता है, इसलिए वैज्ञानिक लगातार शोध कर नई प्रजातियों को विकसित कर रहे हैं। सब्जियों के साथ फलों की भी नई प्रजातियां कृषि विवि में विकसित की जा रही है। इन प्रजातियों की बागवानी कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। - डॉ. केके सिंह, कुलपति कृषि विवि