ये था पूरा मामला
हापुड़ अड्डा चौराहा के पास खसरा नंबर 4632 नजूल की 4930 वर्ग मीटर जमीन है। इसमें से 1675 वर्ग मीटर जमीन पर बिल्डर ने अवैध रुप से कब्जा कर 66 दुकानों के कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर लिया। दुकानें भी बेच दी गईं। अमर उजाला ने 21 जून 2017 के अंक में समाचार प्रकाशित करते हुए पूरे मामले का खुलासा किया था। तत्कालीन मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने मामले को पूरी गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्यप्रकाश पटेल को जांच कराकर रिपोर्ट देने के लिए कहा। तहसील प्रशासन ने अगले ही दिन 22 जून को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। रिपोर्ट में बताया गया था कि 3991.65 वर्ग मीटर जमीन पर 93 लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है। इन लोगों में यूनुस का कॉम्प्लेक्स भी शामिल है। इस रिपोर्ट के बाद 29 जून 2017 को तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने सभी कब्जेदारों को नोटिस जारी कर उनके मालिकाना हक के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने के नोटिस जारी किये थे। वहीं एमडीए की टीम ने 4 जुलाई 2017 को कॉम्प्लेक्स में बनी 66 दुकानों को खाली कराकर सील लगा दी थी। इसी मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट सचिन सैनी ने तहसील प्रशासन की रिपोर्ट और अमर उजाला में प्रकाशित खबरों को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने दो माह के भीतर जिलाधिकारी को कार्रवाई का आदेश दिया था।
मैं इस मामले को गंभीरता से दिखवाता हूं। कोई भी निर्माण हुआ है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
मेरे संज्ञान में मामला नहीं है, लेकिन अब इसकी जांच कराई जाएगी। यदि ध्वस्तीकरण के बाद निर्माण शुरू हो रहा है, तो कार्रवाई होगी।
- राजकुमार, सचिव एमडीए
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