रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मखदूमपुर गंगा घाट पर लगा मेला इस बार राजनीतिक रूप से भी अपनी अलग पहचान बनाएगा। पंचायत चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में इस पावन धरा पर प्रत्याशियों से लेकर मतदाता तक भी श्रद्धालुओं के रूप में यहां पर पहुंचे हैं और अपनी-अपनी पसंद के प्रत्याशियों को गंगा को साक्षी मानकर चुनाव लड़ने की शपथ और हर परिस्थितियों में उनके साथ रहने का प्रण ले रहे हैं।
गंगा किनारे पर इस समय आस्था उल्हास उमंग और संस्कृति के संगम के साथ-साथ राजनीति भी अपनी जगह बनाती नजर आ रही है। अगले वर्ष होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले संभावित उम्मीदवार यहां आकर शिविर लगाने के प्रयासों में जुट गए हैं। मेला स्थल पर कई संभावित प्रत्याशी पहुंचे हैं। जिसमें वह अपने मतदाताओं की जमकर सेवा कर रहे हैं। मखदूमपुर मेले में मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर, गाजियाबाद आदि जिलों से चार लाख से अधिक श्रद्धालु आते हैं। इन जिलों के देहात के इलाकों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसलिए गंगा मेले में इस समय आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बिसात भी बिछाई जा रही है।
तीन से चार दिनों तक मेले में परिवार के साथ श्रद्धाजु ठहरते हैं। ग्रामीण अंचल का यह मेला दो सुपर जोन व तीन सेक्टर में बांटा गया है। इन आवासीय सेक्टरों में कई विशेष शिविर लगाए गए हैं जिससे कि संभावित प्रत्याशी द्वारा मतदाताओं के बीच अपना प्रचार किया जा सके। मेले में आस्था के साथ-साथ राजनीति भी लोगों के सिर चढ़कर बोल रही है।
यहां प्रत्याशियों को गंगा किनारे पर अपनी नैया पार लगने की भी उम्मीद है। इसी मकसद से वह गंगा मैया के किनारे पर पहुंच कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं और मतदाताओं की खूब खातिरदारी भी कर रहे हैं। ऐसे में इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि गंगा किनारे से ही ग्राम पंचायत चुनाव की नींव रखी जा रही है। (संवाद)
मेले में खर्चा कर रहे प्रधानजी
कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले में प्रधानजी बड़े मंच पर आस्था के साथ राजनीति को मजबूत बना रहे हैं और अपने समर्थकों की खूब खातिरदारी कर रहे हैं। समर्थकों के लिए टेंट से लेकर खाने-पीने तक की व्यवस्था की गई है। समर्थक भी अपने प्रधानजी की खूब वाहवाही कर रहे हैं।