हर साल बदल जाता हैं गंगा की धारा का स्वरूप
रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में बाढ़ की भीषण त्रासदी ने यहां बसने वाले बाशिंदों के लिए इस बार एक बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। दूसरी ओर यहां बहने वाली गंगा नदी का बाढ़ क्षेत्र भी काफी बढ़ गया है। कई गांवों तक गंगा की धारा पहुंचने से अब यहां रहने वाले ग्रामीणों के सामने होने वाले खतरों से बचने की चुनौती है।
वैसे तो खादर क्षेत्र के लोगों को प्रतिवर्ष बाढ़ का कहर झेलना पड़ता है। पांच अगस्त से बाढ़ का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह डेढ़ महीने बाद भी कम नहीं हुआ है। खादर क्षेत्र में बहने वाली गंगा नदी में आया बाढ़ का पानी भले ही पहाड़ों का था। मगर बाढ़ की वजह से गंगा नदी ने खादर क्षेत्र में कई स्थानों पर अपना स्वरूप ही बदल लिया है। इसके चलते खादर क्षेत्र के कई गांव इस समय गंगा के किनारे पर आ गए हैं। इनमें फतेहपुर प्रेम, सिरजेपुर, बस्तोरा नारंग आदि शामिल हैं।
उफान पर आई गंगा नदी की धारा से होने वाले खतरे यहां बड़ी आबादी के लिए चिंता का विषय हैं। ये वही गंगा नदी है, जिसके उफान ने खादर क्षेत्र में खूब तबाही मचाई है। कई गांव को बर्बाद कर दिया है जो आज सिर्फ राजस्व विभाग के नक्शे पर ही नजर आते हैं।
गंगा के बदलते स्वरूप और कई गांवों पर कटान के खतरे को देखते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारी अब इस चिंतन मंथन में जुट गए हैं कि आखिरकार खादर क्षेत्र में इस तरह के खतरों से यहां के लोगों को कैसे महफूज रखा जाए। 73 करोड़ की परियोजना से बने तटबंध से कुछ गांवों को बाढ़ से तो बचा लिया परंतु यहां हुए नुकसान को नहीं रोका गया। प्रतिवर्ष गंगा के बदलते स्वरूप को रोकना शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
गंगा नदी बिजनौर और मुजफ्फरनगर सीमा से होते हुए मेरठ के हस्तिनापुर में प्रवेश करती है। जहां-तहां तटबंधों से पानी को रोकने का प्रबंध किया गया था। इस बीच बाढ़ की वजह से गंगा के पानी ने बांध को भी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, तटबंध को टूटने से बचा लिया गया। इससे कुछ हद तक और अधिक होने वाले नुकसान को रोका गया। खादर क्षेत्र के 40 गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इस वर्ष 5 अगस्त से 18 सितंबर के बीच आई बाढ़ के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि गंगा के बाढ़ क्षेत्र में गत वर्षों की अपेक्षाकृत काफी इजाफा हो गया। इस वजह से नुकसान का दायरा भी काफी बढ़ गया। (संवाद)
सरकार को भी होता है बड़ा नुकसान
खादर क्षेत्र में बाढ़ से जहां आम लोगों का नुकसान होता है वहीं सरकार को भी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ता है। यहां पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की सड़कें पानी में बह जाती हैं और उनका पुनर्निर्माण किया जाता है। वहीं किसानों की करोड़ों रुपये की फसलें तबाह हो जाती हैं। नुकसान और बर्बादी का यह सिलसिला निरंतर चल रहा है।
तटबंध से कई गांवों को मिली राहत
बाढ़ को रोकने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा जो तटबंध बनाया गया है वहां पर कटान और नुकसान को रोका गया है। जहां तटबंध नहीं है वहां की परियोजना तैयार की जाएगी। -
प्रमोद कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग