सरूरपुर। इन दिनों धुंध और बादल छाने से फूल और पत्तेदार फसलों पर कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है। सरसों और लाही की फसल में रोएंदार कीट लगने लगा है। कीट पौधे की पत्तियों को नष्ट कर रहा है। सरसों की फसल में आरा मक्खी और माहू हमलावर हो गए है। यह कीट सरसों के तना, पत्ती और फूल के रस को चूस पौधे को नष्ट कर रहे हैं। किसानों की माने तो कीटनाशक भी इन पर बेअसर हो रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. आएस सेंगर के मुताबिक सरसों में माहू का हमला होता है। यह कीट हल्के स्लेटी रंग का होता है। सरसों की पौध में यह कोमल तनों, पत्तियों, फूलों व नई फलियों पर हमला करता है। उसके रस को चूसकर उसे बेजान कर देता है। कीट के प्रकोप से पत्तियां काले कवक का शिकार हो जाती हैं। माहू कीट से सरसों की फसल को बचाने के लिए सबसे पहले किसान संक्रमित पौधे को अलग कर दें। अधिक मात्रा में कीटों का हमला हो तो डाइमिथोएट या मोनोक्रोटोफास की एक लीटर मात्रा को 800 ली. पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। दोबारा कीट का हमला होने पर 15 दिन में फिर से छिड़काव करें। लाही पर आरा मक्खी भी बुरा प्रभाव डालती है। यह पौधे से रस को चूसती है। पुष्प क्रम के प्रमुख भाग को यह मक्खी चट कर जाती है। जिससे पौधे की बाढ़ रुक जाती है। पौधे पर फल आदि नहीं आता है। आरा मक्खी जैसे कीट की रोकथाम के लिए मेलाथियान की 50 ईसी मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दोबारा छिड़काव करें। वहीं काला धब्बा दिखाई देने पर आईप्रोडियान, मैकोंजेब फफूंदी नाशक का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अंतराल पर करते रहना चाहिए। आमतौर पर इन दिनों में खेतों में अक्तूबर के महीने में बोई गई सरसों, लाही, मटर और मसूर के अलावा पत्तेदार सब्जियां बंदगोभी, फूलगोभी, आलू और टमाटर की फसलों में कीटों का हमला शुरू हो जाता है।