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भाकियू की किसान पदयात्रा में जोश भर रहे पूर्वांचल के किसान, कहा- भयावह है अन्नदाता की स्थिति

Sun, 30 Sep 2018 03:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मिर्जापुर के किसान रामनाथ - फोटो : अमर उजाला
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भाकियू की किसान क्रांति यात्रा आज मेरठ से चलकर दिल्ली की ओर आगे बढ़ रही है। इस यात्रा में पूर्वी उत्तर प्रदेश से पहुंचे किसान जोश भर रहे हैं। पश्चिमी यूपी से पहुंचे किसान तो थककर ट्रैक्टर पर बैठ भी जाते हैं, लेकिन पूर्वांचल के किसान कम ही बैठते हैं।

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इन किसानों का कहना है कि, अपना हक लेने के लिए दिल्ली जा रहे हैं। उनके नेता भी पदयात्रा में उनके साथ चल रहे हैं। पदयात्रा में प्रदेश के अलावा मध्यप्रदेश और हरियाणा के किसान भाग ले रहे हैं। अमर उजाला ने शनिवार को दिल्ली की ओर कूच कर रही यात्रा में पैदल चलने वाले किसानों का विश्लेषण किया तो इसमें पूर्वांचल के किसान बाजी मारते नजर आए। 

पश्चिमी यूपी के किसान यात्रा में लंबा नहीं चल पा रहे थे। जबकि गौंडा, बस्ती, जौनपुर, कन्नौज, इलाहाबाद, बनारस, बलिया, गाजीपुर और बुंदेलखंड आदि से पहुंचे किसान और महिलाएं पैदल चलना ही पसंद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें पैदल चलने की आदत है। उनकी तरफ यातायात के ज्यादा साधन नहीं है। किसी को भी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। यहां के किसानों के बच्चे भी खेती छोड़ रहे हैं और उनकी तरफ तो और भी ज्यादा भयावह स्थिति है।

फैजाबाद से पहुंची दयावती और केला देवी ने बताया कि उन्हें खेत होते हुए मजदूरी करनी पड़ती है। फसल बोने के लिए बीज और खाद का इंतजाम नहीं हो पाता है। बुंदेलखंड से पहुंचे महेश निरंजन और मिर्जापुर से पहुंचे रामनाथ ने बताया कि भाजपा ने चुनावी वादे पूरे नहीं किए। किसानों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वे जमीन छोड़कर शहरों की तरफ पलायन कर रहे हैं।  

बुंदेलखंड के किसान महेश निरंजन व किसान महिला मुन्नी देवी - फोटो : अमर उजाला
खूब साधा निशाना
अमेठी की किरण और जालौन की मुन्नी देवी ने भी सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। कहा कि देश के अन्नदाता को हक के लिए पदयात्रा करनी पड़ रही है। इससे ज्यादा खराब हालात और क्या हो सकती है। सरकार को किसानों के लिए सोचना चाहिए। 

@ANINewsUP

Meerut: 'Kisan Kranti Padyatra' with farmers under the banner of Bharatiya Kisan Union is on its way to Delhi. The farmers rally will reach Delhi on October 2. They are demanding complete loan waiver, lower electricity tariff including other things

....भीड़ नहीं जुटा पा रहे
पदयात्रा में देखने को मिल रहा है कि क्षेत्र के किसान यात्रा के लिए खानपान से लेकर तमाम तरह की व्यवस्था तो कर रहे हैं लेकिन भीड़ नहीं जुटा पा रहे हैं। क्षेत्र विशेष के किसान यात्रा का स्वागत कर इतिश्री कर गांव लौट जाते हैं। लेकिन यात्रा में पूर्वांचल और हरियाणा व मध्यप्रदेश के कई जनपदों से पहुंचे किसान 23 सितंबर से ही यात्रा में निरंतर चल रहे हैं। इसमें मुजफ्फरनगर, शामली और बुलंदशहर के किसानों की संख्या भी खासी देखी जा रही है।
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साथ देते तो रचता इतिहास 
किसी भी आंदोलन का इतिहास रचना और उसका विफल होना उस क्षेत्र के लोगों पर निर्भर करता है, जिस जगह आंदोलन हो रहा होता है। सन 1988 में मेरठ कमिश्नरी पर किया गया बाबा टिकैत का आंदोलन इसलिए इतिहास रचने में सफल रहा था, क्योंकि उस समय ऐसा कोई गांव और घर नहीं था जहां से किसान आंदोलन में नहीं पहुंचा हो। किसान क्रांति यात्रा में ये देखने को नहीं मिला। जिले के किसानों ने खानपान की तो व्यवस्था कराई लेकिन यात्रा में शामिल होने वालों की संख्या बेहद कम रही। 

भारतीय किसान आंदोलन का समर्थन 
भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी और संयोजक हरवीर सिंह निलोहा ने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचकर यात्रा को समर्थन दिया और चौधरी नरेश टिकैत व राकेश टिकैत का माल्यार्पण कर स्वगत किया। वहीं बायपास पर भाजपा महिला विंग की जिलाध्यक्ष नेहा त्यागी के नेतृत्व में भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत एवं प्रवक्ता राकेश टिकैत का पगड़ी एवं भगवान गणेश की मूर्ति देकर स्वागत किया गया। 

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