पचास हजार का इनाम होते ही मोनू जाट मोस्ट वांटेड हो चुका है। पुलिस के धुरंधर उसकी धरपकड़ में लगे हैं। लेकिन वह फिर भी खून बहा रहा है। पुलिस के तमाम दावे रोहटा गांव के ईख के खेतों की तरफ जाते ही हवा होने लगते हैं।
रंगदारी न देने पर जान ले रहे मोनू जाट की घेराबंदी में तीन सीओ समेत पुलिस की छह टीमें लगी हैं। तीन इंस्पेक्टर, 20 दरोगा और 50 सिपाहियों की टीम उसका ठिकाना तलाशने में फेल साबित हो रही है। रोहटा गांव में सुरक्षा की दृष्टि से एक प्लाटून पीएसी को अलग से तैनात किया गया है। इसके बावजूद मोनू जाट को पकड़ना पुलिस के लिए आसान नहीं है।
रंगदारी न देने पर किसान दंपति की एलानिया हत्या के बाद पुलिस अफसरों की नींद टूटी थी तो गांव में पुलिस और पीएसी तैनात कर एसपी देहात और सीओ सरधना ने ड्रोन कैमरे की मदद ली थी। मोनू की लोकेशन गांव के आसपास और जंगल में ही मिलने के बावजूद वह पकड़ा नहीं जा सका। इसके बाद उसने गांव में घर में घुसकर पुलिस और पीएसी की सुरक्षा के बीच चमड़ा व्यापारी को मार डाला। ग्रामीणों ने पुलिस अफसरों का घेराव कर उसके एनकाउंटर की मांग की। लेकिन पुलिस को धता बताते हुए मोनू ने शनिवार को बागपत में किसान की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। कई परिवार रोहटा में दहशत में है तो कई लोग गांव छोड़कर चले गये हैं।
इन धुरंधरों पर भारी पड़ रहा मोनू
एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन, एसपी क्राइम अजय सहदेव, सीओ सरधना ब्रिजेश कुमार, सीओ दौराला डॉ. अरविंद कुमार और सर्विलांस के एक्सपर्ट सीओ सिविल लाइन विनोद कुमार सिरोही के अलावा इंस्पेक्टर राजेश वर्मा, कई थानों में एसओ रह चुके प्रशांत कपिल, क्राइम ब्रांच की रीढ़ माने जाने वाले संजीव यादव, स्वाट टीम के प्रभारी, जोनल क्राइम ब्रांच की टीम समेत 20 दरोगा और 50 सिपाहियों को टास्क दिया गया है। जबकि एसटीएफ ने अलग से जाल बिछा रखा है।