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सौहार्द की मिसाल है असलम का परिवार, सावन माह का करते हैं बेसब्री से इंतजार

Sun, 09 Jul 2017 05:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रिजवान खान मेवाती, मेरठ
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कावड़ तैयार करते असलम के परिवार के सदस्य
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किसी शायर की उक्त पंक्तियां इस मुस्लिम परिवार पर सटीक बैठती है, जो मजहब की दीवार से ऊपर उठकर पिछले पांच दशकों से शिवभक्तों के लिए कांवड़ तैयार करते हैं। यह सोचकर इस मनोयोग से कांवड़ सजाते हैं कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ लेकर आने वाले की मन्नतों और पुण्यों के वे भी साझीदार हो सकेंगे।
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लिसाडी गेट थाना क्षेत्र के तारापुरी की गली नंबर 6 में रहने वाले असलम के परिवार में सावन आने से एक माह पूर्व ही मानों खुशियां आने लगती हैं। यह परिवार इस माह का खास इंतजार करता है। कारण, यह कांवड़ यात्रा का माह है। इस पावन माह में शिवभक्त कांवड़ लाते हैं। यह परिवार कांवड़ तैयार करने का हुनर जानता है। इससे जो कमाई होती है, उससे परिवार का खर्चा चलता है। मुस्लिम आबादी में रहते हुए जब उस परिवार के घर जाते हैं तो ऐसा लगता है कि जैसे किसी शिवभक्त के घर में आ गए हो। घर में प्रवेश करते ही भगवान शिव के बडे़ बडे़ चित्र दिखाई देते हैं। परिवार के सदस्य तन्मयता के साथ कांवड़ तैयार करते हुए मिलते हैं। असलम का परिवार दशकों से हिंदू भाइयों के लिए कांवड़ तैयार करते हैं।
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दादा ने शुरू की थी कांवड़ बनानी

कावड़ तैयार करते
असलम ने बताया कि उनके दादा इलाही खान ने कांवड़  तैयार करने का कार्य शुरू किया था। इसके बाद कांवड़ बनाना हमारे परिवार का पुश्तैनी कार्य बन गया। दादा की कांवड़ तो इतनी मशहूर थी कि दूर दराज से शिवभक्त ऑर्डर देकर बनवाते थे। असलम के साथ ही चौथी पीढ़ी का उनका बेटा खुर्रम भी कांवड़ बनाने में मशगूल है। उसने बताया कि उसका परिवार 50 सालों से कांवड़ तैयार कर रहा है। असलम बताते है, कि जब उन्हें स्पेशल कांवड़ का ऑर्डर मिलता है तो वह उसे खुद तैयार करते हैं। परिवार में उनके साथ परिवार की महिलाओं सहित उनका बेटा खुर्रम, सलमान, सोनू भी कांवड़ बनाते हैं।

5 सौ से 50 हजार तक की कांवड़
असलम ने बताया कि एक कांवड़  तैयार करने की कीमत पांच सौ रुपये से शुरू होकर पचास हजार तक है। ऑर्डर के अलावा जितनी कांवड़ बनती है, उन्हें हरिद्वार ले जाकर भी बेचा जाता है। इसके लिए असलम और उनका छोटा बेटा सलमान वहां जाते हैं। उनका कहना है कि बहुत से श्रद्धालु ऐसे भी आते हैं जिनके पास कांवड़ खरीदने के लिए पूरी कीमत नहीं होती, उन्हें वे काफी कम कीमत में कांवड़ दे देते हैं। असलम का कहना है कि हमें हिंदू मुस्लिम का भेदभाव भुलाकर इंसानियत का पैगाम देना चाहिए।

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