माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। दशमेश नगर में चल रही श्रीराम कथा में शुक्रवार को कथा व्यास जनार्दन तिवारी ने भगवान श्रीराम के वनगमन के बाद आने वाले कई प्रसंग सुनाए। कथा में ऋषि भारद्वाज आश्रम, त्रिवेणी तट, महर्षि वाल्मीकि से भेंट, चित्रकूट प्रवास, महर्षि अत्रि एवं माता अनुसूइया से मुलाकात, पम्पा सरोवर, शबरी आश्रम और पंचवटी तक की यात्रा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
कथा व्यास ने कहा कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, सीता एवं लक्ष्मण सर्वप्रथम ऋषि भारद्वाज के आश्रम पहुंचे। ऋषि ने लोक कल्याण का संदेश दिया। बाद में प्रभु त्रिवेणी संगम क्षेत्र पहुंचे। आगे चलकर महर्षि वाल्मीकि से भेंट हुई। महर्षि वाल्मीकि ने प्रभु को चित्रकूट में प्रवास करने की सलाह दी। चित्रकूट पहुंचकर श्रीराम ने अपनी कुटिया बनाई और वहीं वनवास का महत्वपूर्ण समय व्यतीत किया।
कथा में महर्षि अत्रि और माता अनुसूइया के प्रसंग का भी वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि माता अनुसूइया ने सीता को पतिव्रत धर्म, सदाचार और नारी जीवन के उच्च आदर्शों की शिक्षा दी। उन्होंने सीता जी को दिव्य वस्त्र एवं आभूषण प्रदान कर आशीर्वाद दिया। यह प्रसंग भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति, मर्यादा और आदर्श गृहस्थ जीवन की प्रेरणा देता है। कथा के अंत में पंचवटी प्रसंग सुनाया गया। इनमें शूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध और सीता हरण की घटनाएं शामिल रहीं। कथा के दौरान श्रद्धालु श्रीराम के जयकारे लगाते रहे। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ।
कान्हा के भजनों पर झूमे श्रद्धालु
मेरठ। नेहरू नगर में शीश का दानी समर्पण चैरिटेबल संस्था की ओर से भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा व्यास बृज किशोर तिवारी ने भगवान कृष्ण से जुड़े विभिन्न प्रसंग सुनाए। इस दौरान श्रद्धालु कान्हा के भजनों को सुनकर झूम उठे। इस अवसर पर संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल, सुशील गुप्ता, पायल गुप्ता, अक्षत, मुस्कान, ऋषि शर्मा, राधा, रुचि आदि मौजूद रहीं। वहीं, सूरजकुंड रोड फूलबाग कॉलोनी में पंडित हरिओम शरण ने कथा का महत्व बताते हुए कथा का विश्राम किया। पूर्ण आहुति के बाद प्रसाद वितरण किया गया। ब्यूरो