महामारी के खौफ ने मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। सूरजकुंड शवदाह गृह में रविवार दोपहर कोरोना का खौफ चरम पर देखने को मिला। तीन शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था। इस बीच एंबुलेंस की आवाज गूंज उठी। अपने प्रिय जनों के अंतिम संस्कार में आए लोग एंबुलेंस को देख किनारे खड़े हो गये।
पीपीई किट में मौजूद दो पुरोहितों ने मृतक विजय गर्ग के बेटे से पूछा कि कोई और रिश्तेदार नहीं आया। भरी आवाज में मोहित ने कहा, मैं ही पिता की सभी अंतिम क्रियाएं पूरी करूंगा और उसकी आंखें भर आईं। चालक शव को एंबुलेंस से उतारकर चला गया। शव को चिता तक ले जाने के लिए सिर्फ पुत्र ही मौजूद था। इस दौरान दोनों पुरोहितों ने ही उसकी मदद की।
केसरगंज निवासी विजय गर्ग (65) की मृत्यु मेडिकल कॉलेज में शनिवार शाम हो गई थी। बुढ़ाना गेट निवासी राजन सिंघल ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने उनके मौसा को भर्ती से लेकर इलाज करने तक में घोर लापरवाही बरती। मौत के बाद भी शव को ले जाने की व्यवस्था एंबुलेंस चालक कर रहा है। लेकिन सिर्फ एक कर्मचारी आया। ऐसे में परिजन भी इस माहौल में खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।