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कोरोना के खौफ ने झकझोरी संवेदनाएं आखिरी वक्त में बुजुर्ग को नसीब न हो सके चार कंधे, पीपीई किट पहने पुरोहितों ने कराया अंतिम संस्कार

Mon, 27 Apr 2020 01:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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महामारी के खौफ ने मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। सूरजकुंड शवदाह गृह में रविवार दोपहर कोरोना का खौफ चरम पर देखने को मिला। तीन शवों का अंतिम संस्कार हो रहा था। इस बीच एंबुलेंस की आवाज गूंज उठी। अपने प्रिय जनों के अंतिम संस्कार में आए लोग एंबुलेंस को देख किनारे खड़े हो गये।
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पीपीई किट में मौजूद दो पुरोहितों ने मृतक विजय गर्ग के बेटे से पूछा कि कोई और रिश्तेदार नहीं आया। भरी आवाज में मोहित ने कहा, मैं ही पिता की सभी अंतिम क्रियाएं पूरी करूंगा और उसकी आंखें भर आईं। चालक शव को एंबुलेंस से उतारकर चला गया। शव को चिता तक ले जाने के लिए सिर्फ पुत्र ही मौजूद था। इस दौरान दोनों पुरोहितों ने ही उसकी मदद की।

केसरगंज निवासी विजय गर्ग (65) की मृत्यु मेडिकल कॉलेज में शनिवार शाम हो गई थी। बुढ़ाना गेट निवासी राजन सिंघल ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने उनके मौसा को भर्ती से लेकर इलाज करने तक में घोर लापरवाही बरती। मौत के बाद भी शव को ले जाने की व्यवस्था एंबुलेंस चालक कर रहा है। लेकिन सिर्फ एक कर्मचारी आया। ऐसे में परिजन भी इस माहौल में खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
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दोपहर सही बताया और शाम को दी मौत की सूचना
मृतक विजय गर्ग के बेटे मोहित गर्ग और भांजे राजन ने आरोप लगाया कि शनिवार दोपहर अस्पताल में फोन कर पिता का हालचाल पूछा था तब हालत में सुधार बताया गया। शाम को फोन करने पर उन्होंने कहा कि विजय गर्ग की मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के शोक में डूबे मोहित ने बताया कि उनके पिता धर्मार्थ कार्यों में काफी समय व्यतीत करते थे। लगभग दस दिन पूर्व से उन्हें बुखार और खांसी की समस्या थी। पहले निजी अस्पताल में दिखाया। वहां सुविधा न मिलने पर वह जिला अस्पताल में दो बार गए।

हर बार उन्हें दवा देकर वापस भेज दिया गया। कोई जांच के लिए आदेश नहीं दिया गया। मंगलवार को भी मेडिकल कॉलेज गए। बुधवार को मकबरा डिग्गी क्षेत्र में उनका सैंपल लिया गया। शुक्रवार को तबीयत ज्यादा खराब होने के कारण उन्होंने मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। मोहित ने बताया कि उनके पिता को फालिश भी पड़ गया। चिकित्सा सुविधाओं के नाम पर सरकारी अस्पताल में सिर्फ खानापूर्ति ही की जा रही है।

बेटियों को नहीं बुलाया
विजय गर्ग की मौत की सूचना उनकी दोनों बेटियों को भी फोन पर दे दी गई। हालांकि परिजनों और अन्य रिश्तेदारों ने उन्हें घर आने से मना कर दिया। भांजे राजन ने बताया कि दोनों बेटियां शादीशुदा हैं और मेरठ में ही रहती हैं। अन्य रिश्तेदारों को भी घर न आने की सलाह दी गई। बीमारी के चलते सभी को सतर्कता बरतनी चाहिए। अपनी भावनाओं पर काबू करने की जरूरत है।
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