नवरात्र पर देवी शक्तिपीठ से लाई जाती है ज्योति, 14 दिन तक जलती है अखंड ज्योति
पूजा के बाद किया जाता है गंगा में विसर्जित
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मेरठ शहर रामायण और महाभारत कालीन इतिहास को संजोए है। रजबन बाजार स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर इसी समृद्ध परंपरा का जीवंत प्रमाण है। लगभग 100 वर्ष पुराना यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के अवसर पर यहां जल रही अखंड ज्योति की 14 दिन तक पूजा की जाती है। इस मंदिर में प्रतिवर्ष नवरात्र पर किसी ने किसी देवी शक्तिपीठ जैसे वैष्णो देवी, शाकंभरी देवी, कालका देवी आदि स्थानों से ज्योति लाकर 14 दिन पूजा के बाद गंगा में विसर्जित की जाती है।
इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि मंदिर का इतिहास ब्रिटिश काल से जुड़ा इतिहास है। रजबन बाजार तब छावनी के हृदय स्थल के रूप में विकसित हुआ। यह स्थान भारतीय सैनिकों और स्थानीय लोगों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक आदान प्रदान का केंद्र बन गया। मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर 1920 से पूर्व स्थापित हुआ। क्षेत्रीय निवासी दीपक बंसल ने बताया कि तब महिलाएं पैदल यात्रा कर सहारनपुर के प्रसिद्ध शाकंभरी देवी मंदिर से पवित्र ज्योति लाती थीं। यह परंपरा आज भी जीवंत है। इस वर्ष परंपरा निभाते हुए महिलाएं दिल्ली के छतरपुर स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर से ज्योति लाई हैं।
- मंदिर में सबसे प्राचीन मूर्ति देवी दुर्गा की
- इतिहासकार एके गांधी ने बताया कि मंदिर में सबसे प्राचीन मूर्ति देवी दुर्गा की है। इसके साथ सरस्वती माता और लक्ष्मी माता की मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर परिसर में शिव परिवार, राम दरबार के साथ प्राचीन शिवलिंग स्थापित है राधा कृष्ण की मनमोहक मूर्ति सभी को भक्ति रस से ओतप्रोत करती है। विशाल हनुमान जी का स्वरूप भक्तों को शक्ति देता है। परिसर में एक प्राचीन पीपल का वृक्ष है। इसकी छांव में भक्त ध्यान और आराधना करते हैं। मंदिर में 100 किलो वजन की साईं बाबा की भी मूर्ति है।
- सैनिक परिवार, स्थानीय लोग करते हैं पूजा
1857 की क्रांति का उद्घोष मेरठ से ही हुआ। छावनी क्षेत्र में धार्मिक स्थल सैनिकों के लिए आध्यात्मिक सहारा बने। यह मंदिर भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। आवासीय क्षेत्र में रह रहे सैनिक परिवार और स्थानीय निवासी यहां एकजुट होकर पूजा अर्चना करते थे और यह परंपरा आज भी कायम है।