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मन, वचन और काया की शुद्धि से खुलते हैं मोक्ष के द्वार : भाव भूषण

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कस्बे के कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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- प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आठवां दिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के आठवें दिन श्रद्धा और भक्ति संपन्न हुआ। मुख्य मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान का विधिविधान से अभिषेक किया। श्रद्धालु त्रिमूर्ति जिनालय पहुंचे, जहां भूगर्भ से प्राप्त प्राचीन अतिशयकारी जिन प्रतिमा के समक्ष विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
मंगलाष्टक, दिग्बंधन, पात्र शुद्धि, स्थल शुद्धि और सकलीकरण की धार्मिक क्रियाओं के बाद पांडुकशिला पर शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा विराजमान की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य सुमत चंद जैन, प्रवीण जैन और नंदनी जैन को प्राप्त हुआ।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि जिनेंद्र देव की भक्ति कर्म निर्जरा का प्रमुख कारण है। मंदिर में प्रवेश करते समय मनुष्य को सांसारिक चिंताओं, घरेलू चर्चाओं और धन-संपत्ति के विचारों का त्याग कर केवल धार्मिक भावनाओं को स्थान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर में व्यावहारिक चर्चा करना पाप का कारण बनता है, जबकि धार्मिक मर्यादाओं का पालन पुण्य बंध का मार्ग प्रशस्त करता है।
मुनि भाव भूषण ने कहा कि यह आत्म उन्नति का स्वर्णिम अवसर है। जो व्यक्ति इसके महत्व को समझता है, वह जीवन में आने वाली बाधाओं और उपसर्गों को सहर्ष स्वीकार करते हुए साधना पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने कहा कि यदि मन, वचन और शरीर शुद्ध हों तथा मन में केवल भगवान की भक्ति हो तो ईश्वर भी उसके लिए मोक्ष और स्वर्ग के द्वार खोल देते हैं।
शांतिनाथ भगवान के समक्ष बनाए गए मंडल पर विधान के आठवें दिन करीब 150 परिवारों ने अर्घ्य और श्रीफल अर्पित किए। विधान का संचालन युवा विद्वान पंडित आशीष जैन शास्त्री और दिलीप शास्त्री द्वारा कराया जा रहा है।
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इस मौके पर तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, शशांक जैन, प्रमोद जैन, रोहित जैन, उमेश जैन, शुभम जैन, कुश जैन और अन्य श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।
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