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कैंट में वसूली का ठेका आज हो जाएगा खत्म

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मेरठ। कैंट में 11 जगहों पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूली का ठेकेदार का ठेका आज सोमवार रात 12 बजे खत्म हो जाएगा। इसके बाद वसूली कैंट बोर्ड के कर्मचारी करेंगे या फिर कोई ओर, इस पर फैसले के लिए सोमवार सुबह 11:30 बजे कैंट बोर्ड की आपात बैठक बुलाई गई है।
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सात दिसंबर 2019 से कैंट में छह की बजाय 11 जगहों पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है। जहां मवाना-रुड़की और दिल्ली रोड वसूली केंद्र बढ़ाने के खिलाफ व्यापारियों के तीखे विरोध के चलते कैंट बोर्ड को इन तीन केंद्रों को हटाना पड़ा था। लेकिन ठेका 11 जगहों पर छोड़े जाने के कारण ठेकेदार को इसका लाभ मिला और हाईकोर्ट ने 11 जगहों पर ही वसूली पर मुहर लगा दी। कैंट अधिकारियों ने दावा किया था कि अगली बार 11 जगहों पर ठेका नहीं छोड़ा जाएगा लेकिन पूर्व सीईओ ने फिर से 11 जगहों पर ही वसूली के ठेके का टेंडर जारी कर दिया। जिसको लेकर कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से शिकायत की तो जिला प्रशासन ने कैंट बोर्ड अधिकारियों से स्पष्ट कर दिया था कि ये पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के स्वामित्व वाली सड़कें हैं, ऐसे में इन पर वसूली नहीं की जा सकती है। तय हुआ था कि 11 जगहों में से रुड़की रोड-मवाना रोड और दिल्ली रोड को हटाकर ही टेंडर फाइनल किया जाएगा।
सड़कें पीडब्लूडी-एनएचएआई की, नियम कैंट में लागू
ठेकेदार ने कैंट बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना महामारी के कारण देश में सड़कों पर वाहनों की संख्या कम रही है। ऐसे में एनएचएआई ने गाइड लाइन जारी की हैं। उसके मुताबिक या तो ठेके की रकम में राहत दे दी जाए या फिर 77 दिन का ठेका आगे बढ़ा दिया जाए। इसको लेकर सोमवार सुबह कैंट बोर्ड की आपात बैठक बुलाई गई है।
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क्या कर रहे हैं प्रशासनिक अधिकारी
तीनों सड़कें पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के स्वामित्व की हैं। ऐसे में इन पर कैंट बोर्ड टोल नहीं वसूल सकता है। इस पर कोर्ट ने भी रोक लगा दी थी। जिसके बाद देश की कई छावनी से अफसरों ने टोल का नाम खत्म करते हुए इसे वाहन प्रवेश शुल्क का नाम दे दिया था। सवाल ये है कि अगर एनएचएआई की ऐसी कोई गाइड लाइन जारी हुई भी है तो वह टोल ठेके को लेकर हो सकती है न कि वाहन प्रवेश शुल्क वसूली पर वह लागू हो सकती है। दूसरी अहम बात ये है कि जो ठेका एनएचएआई ने छोड़ा हो वहां पर यह नियम लागू हो सकता है, लेकिन कैंट में उसका नियम कैसे लागू हो सकता है। ये पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठ चुका है। ऐसे में देखना ये है कि मेरठ प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की तरफ से इसको लेकर कोई एक्शन लिया जाएगा या फिर खामोशी रहेगी।
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