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कॉलेज की लैब को बना दिया नीम हकीम की दुकान, लैब में मिली चौंकाने...

Fri, 08 Sep 2017 09:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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कॉलेज की लैब में मिला चौंकाने वाला सामान
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मेरठ में दिल्ली रोड़ स्थित फैज ए आम डिग्री कालेज के प्राचार्य का पीएचडी डिग्री से कैंसर के मरीजों के इलाज का मामला बुधवार को शहर में चर्चा का विषय रहा। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने पर सीएमओ ने जांच के आदेश जारी कर दिये हैं। डिप्टी सीएमओ स्तर के अधिकारी इस जांच को करेंगे। उधर, कैंसर के इलाज करने वाले प्राचार्य ने बुधवार को भी डिग्री कालेज के बाहर से कैंसर रिहेबिलिटेशन सेंटर को बोर्ड नहीं हटाया। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने कालेज की साईंस लैब का जायजा लिया तो लैब में चौंकाने वाला सामान मिला। ये लैब कम और नीम हकीम की दुकान ज्यादा मिली।
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प्राचार्य डॉ. एफ रहमान ने पूरी लैब में कैंसर की दवा बनाने का सामान सजा रखा है। कालेज के स्टाफ ने बताया कि लैब में जाने की हर किसी को अनुमति नहीं है। कोई दोस्त हो या रिश्तेदार सभी लैब के बाहर ही प्राचार्य से मुलाकात कर सकते हैं। प्राचार्य को डर रहता है कि कैंसर की दवाई के नाम पर वे क्या बांट रहे हैं किसी को भनक ना लग जाये। हमने लैब को देखा तो उसमें पीसा लहसुन, कसूरी मेथी, रसोई में काम आने वाले मसाले और दर्जनों तरह की दवा के पैकेट भरे थे। लैब में दवा बनाकर उसको छोटे छोटे पैकेट में भरकर तैयार किया गया था। लैब में अलग अलग डिब्बो में दवाई भरी पड़ी थी। लैब में दावा देने में एक युवती भी प्राचार्य का सहयोग करती है। एक सप्ताह की दवा के 2 हजार वसूले जाते हैं। सबसे बड़ी धांधली ये है कि कालेज में साईंस की पढ़ाई ही नहीं होती, गुमराह करने के लिए लैब बनाई गई है।

प्राचार्य के कार्यालय के बाहर डिग्री का बोर्ड

काॅलेज के बाहर प्राचार्य द्वारा लगाया गया बोर्ड - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
फैज ए आम डिग्री कालेज में प्राचार्य एफ रहमान की डिग्री का बोर्ड लगा हुआ है। जिसमें एमएससी, पीएचडी और एफआईसीएस की डिग्री दर्शायी गई हैँ। उन्होने केमिस्ट्रिी से पीएचडी किया है। एफआईसीएस (फेलो ऑफ द इंटरनेशल कालेज ऑफ सर्जन) यूएसए की डिग्री दर्शायी गई है। ये डिग्री सिर्फ मेडिकल चिकित्सकों को मिलती है। बोर्ड पर इस तरह की डिग्री का दर्शाना एफ रहमान को शक के घेरे में लेने के लिए काफी है। 

नहीं हटा कैंसर मुक्ति केंद्र का बोर्ड
खबर प्रकाशित होने पर कालेज के बाहर से कैंसर रिहेबिलिटेशन का बोर्ड नहीं हटाया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही कहें या पीएचडी वाले डाक्टर की तानाशाही। लोगों को गुमराह करके पैसा कमाने का धंधे में वो शायद भूल गये कि वो कालेज के प्राचार्य भी है।
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लैब से मिला यह सामान
उल्लेखनीय है कि अमर उजाला ने खुलासा करते हुए बुधवार को इसे प्रकाशित किया था। शहर के बीचों बीच फैज-ए-आम डिग्री कालेज में एक ऐसा ही केंद्र खोला गया है जिसमें कैंसर मुक्ति के नाम पर लोगों को जमकर चूना लगाया जा रहा है। दिल्ली रोड स्थित फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज के सामने पहुंचेंगे तो कॉलेज के बाहर बड़ा बोर्ड लगा दिखाई देगा। कैंसर रिहेबिलिटेशन सेंटर के इस बोर्ड पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. एमएफ रहमान का फोटो और फोन नंबर के साथ उनको सांइटिस्ट दर्शाया गया है। बोर्ड साफ साफ दर्शा रहा है कि कॉलेज में कैंसर मुक्ति का इलाज हो रहा है। कॉलेज के प्राचार्य खुद इस सेंटर का संचालन कर रहे हैं। प्राचार्य एमएफ रहमान के पास डिग्री तो पीएचडी की है। लेकिन पेशा मेडिकल डिग्री वाला अपना लिया है। पीएचडी डिग्री धारक कैसे कैंसर पीड़ितों को दवाई देकर उनकी जिंदगी बचाने का ख्वाब दिखा सकता है। 

प्राचार्य बोले, आ जाओ इलाज के लिए
फैज-ए-आम कॉलेज के प्राचार्य को मरीज बनकर फोन किया गया तो उन्होंने बेबाक कहा कि वह कॉलेज में सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक बैठते हैं। उनके अलावा एक डिग्रीधारक डॉक्टर भी उनके साथ बैठता है। मरीज़ को 5 हज़ार रुपये महीना तक की दवाई दी जाती है। हालांकि उन्होंने डॉक्टर का नाम नहीं बताया। वहां पहुंचने पर डॉक्टर साहब का कहना था कि हमारे कॉलेज में कैंसर रिसर्च सेंटर खोला गया है। हम कैंसर के मरीज को दवाई नही देते। पहले केवल डाइट बदलकर ही मरीज का इलाज करते हैं।

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