मेरठ। बेसिक शिक्षा विभाग के एक शिक्षक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी का फर्जी आदेश तैयार कर खुद को लिपिक के पद पर संबद्ध कर लिया। यह शिक्षक लंबे समय से न तो विद्यालय पहुंचा और न ही कई माह से कार्यालय आया। उसने शिकायत करने वाले शिक्षक को वेतन रुकवाने की धमकी दी। पूर्व में यह शिक्षक कई कार्यालयों के अतिरिक्त एनआईसी में कंप्यूटर पर डाटा फीड करता था। इस मामले में बीएसए ने संबद्धता निरस्त कर शिक्षक को मूल विद्यालय में पहुंचने के निर्देश दिए हैं।
मामला रजपुरा ब्लॉक के नंगली आजमाबाद विद्यालय का है। यहां के एक शिक्षक ने फरवरी 2016 को तत्कालीन बीएसए मोहम्मद इकबाल को प्रार्थना पत्र बताया कि वह कंप्यूटर कार्य में दक्ष है। इसलिए उसे बीएसए ऑफिस में कंप्यूटर कार्य के लिए संबद्ध कर दिया जाए। इसके बाद इस शिक्षक ने बीएसए का फर्जी आदेश तैयार कर लिया। इसके बाद बीएसए की फर्जी संबद्ध रिपोर्ट फाइल में लगा दी। इसके उपरांत यह शिक्षक बीएसए ऑफिस, एनआईसी तथा दूसरे स्थानों पर कार्य करने के बहाने नदारद है। एक अन्य शिक्षक ने इसकी शिकायत की। इस पर उसने धमकी दी कि वह बीएसए कार्यालय में बतौर वरिष्ठ लिपिक काम कर रहा है। छह हजार शिक्षक उसके नीचे कार्य करते हैं। यदि कार्यालय में शिकायत की तो वेतन रुकवा दिया जाएगा।
इस मामले की गोपनीय जांच शुरू हुई तो पता चला कि शिक्षक ने खुद ही तत्कालीन बीएसए का फर्जी आदेश तैयार कर स्वयं को लिपिक के पद पर संबद्ध कर लिया। वहीं, इस मामले में बीएसए ने जांच बैठा दी। जिसमें सामने आया कि वह शिक्षक लंबे समय से न तो विद्यालय और न ही कार्यालय आ रहा है। वहीं, रजपुरा ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी भारत भूषण त्यागी का कहना है कि पता चला है कि उक्त शिक्षक ऑफिस में तैनात था। किसके आदेश पर कार्यालय में तैनाती पाई इसकी जांच कराई जा रही है।
तो क्या लिपिक नहीं रहे
बीएसए कार्यालय में लिपिकों की कमी नहीं है। इसके बावजूद कार्यालय में शिक्षक से कंप्यूटर का कार्य लिया गया। इससे पूर्व में तैनात रहे अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि पूर्व के खंड शिक्षा अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
वर्जन
सभी शिक्षकों की संबद्धता निरस्त की जा चुकी है। अब जांच कराई जा रही है कि यह शिक्षक मूल विद्यालय में कब से नहीं पहुंचा है। पूर्व के अधिकारियों के आदेश पत्र की भी जानकारी की जा रही है।-सतेंद्र ढाका, बीएसए