रिश्वत देने IG दफ्तर पहुंची बच्ची, कहा- साहब ये गुल्लक ले लो और मां को न्याय दिला दो
Wed, 05 Jul 2017 09:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
सार
गुल्लक देकर बच्ची बोली, मम्मी की मौत के आरोपियों को पकड़ो, आईजी ने एसएसपी को तुरंत ही बुलाया, मामले की जानकारी ली, 29 अप्रैल 2017 को बच्ची की मां ने फांसी लगाकर दी थी जान, गंगानगर में महिला का मायका और सरधना के कपसाड़ में सुसराल
बगैर पैसा पुलिस काम नहीं करती है, यह धारणा लोगों के जेहन में हैं। मंगलवार को पांच साल की मासूम ने आईजी को रिश्वत के तौर पर अपनी गुल्लक देकर कहा कि मेरी मम्मी की मौत के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करा दो। आईजी मामले को समझ पाते कि बच्ची के साथ आए उसके मामा ने उनको शिकायती पत्र भी सौंपा। आईजी ने तुरंत एसएसपी को अपने ऑफिस बुलाकर जानकारी ली। आईजी ने मामले की निष्पक्ष जांच करने का आश्वासन देकर भेजा।
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गंगानगर आई ब्लाक निवासी पशु चिकित्सक शांति स्वरूप की बेटी सीमा कौशिक ने 29 अप्रैल को अपने मायके में फांसी लगाकर जान दी थी। आरोप है कि सीमा का पति संजीव शर्मा निवासी कपसाड़ सरधना और परिजन दहेज उत्पीड़न कर रहे थे। जिसका मुकदमा भी पंजीकृत है। संजीव और सीमा की एक पांच साल की बेटी मानवी शर्मा है। जोकि अपनी नाती के पास रहती है। सीमा की मौत के बाद पुलिस ने संजीव को जेल में भेजा दिया, जबकि अन्य चार आरोपियों को गिरफ्तार करने से पुलिस आनाकानी कर रही है।
मंगलवार को पांच साल की मानवी शर्मा अपने नाना शांति स्वरूप और मामा रोहित कौशिक के साथ आईजी रेंज ऑफिस पहुंची। मानवी अपनी एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्कों से भरी गुल्लक भी लेकर गई थी। पिता-पुत्र सीमा की मौत के मामले को आईजी से बता रहे थे, तभी मानवी आईजी की तरफ आगे बढ़ी और अपनी गुल्लक उनको देने की पेशकस कर दी। मानवी ने मम्मी सीमा के मौत के आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की। बच्ची की गुल्लक देखते आईजी ने पिता-पुत्र की शिकायत तसल्ली से सुनी।
आईजी से मिलकर लौटी मानवी के हाथ से गुल्लक आईजी ऑफिस में छूट गई। गुल्लक फूटी और उसके सारे पैसों के सिक्के बिखर गए। गुल्लक फूटते ही मानवी मायूस हो गई। नाना और मामा ने मानवी को गले लगाकर कहा कि दूसरी गुल्लक दिलवा देंगे। पीड़ित परिवार ने सरधना और गंगानगर पुलिस पर आरोपियों से साठगांठ करने का आरोप लगाया है।
दरोगा की टिप्पणी पर लगाई थी सीमा ने फांसी
पीड़ित परिवार का आरोप है कि सीमा कौशिक अपने पति और ससुरालियों पर कार्रवाई की मांग करने सरधना थाने गई थी। जहां पर एक दरोगा ने सीमा से कहा कि अगर तू मर जाएगी तो संजीव जेल चला जाएगा। उसके बाद ही सीमा ने यह कदम उठाया था। सीमा करीब साढ़े पांच साल से अपने मायके में रह रही थी। उसकी बच्ची भी मायके में ही हुई थी।
दो बार आरोपियों को पुलिस ने छोड़ा
शांति स्वरूप ने बताया कि नामजद आरोपियों को दो बार पकड़कर पुलिस को सौंपे। गंगानगर पुलिस ने तीन दिन पहले एक आरोपी को साठगांठ करके थाने से छोड़ दिया। सीमा को इंसाफ दिलाने के लिए उसके पिता व भाई लगे है। लेकिन पुलिस आरोपियों को बचाने में लगी हुई है। पीड़ित परिवार का कहना कि सीमा का दहेज उत्पीड़न हुआ, जिससे परेशान होकर उसने जान दी।
एसएसपी को बुलाकर ली जानकारी
आईजी रामकुमार ने एसएसपी जे. रविंदर गौड़ को अपने ऑफिस बुलाया। मामले की जानकारी ली। एसएसपी ने बताया कि सीमा वाले केस में उसका पति संजीव शर्मा को पुलिस ने जेल भेज दिया है। अन्य आरोपियों को बेवजह फंसाया जा रहा है। आईजी ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया तो उनकी शिकायत की दोबारा से भी जांच करा लेंगे। अगर आरोप सिद्ध होता है तो उनको भी जेल भेजा जाएगा।
इंसाफ के लिए हर प्रयास करेंगे
पीड़ित परिवार का कहना है कि बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए हर प्रयास करेंगे। मेरठ के पुलिस अधिकारियों से सुनवाई नहीं की तो वह मुख्यमंत्री और डीजीपी से भी शिकायत करेंगे। जरूरत पड़ी तो आरोपियों पर कार्रवाई की मांग लेकर धरना प्रदर्शन भी करेंगे। बेटी की मौत में अकेला पति संजीव शर्मा ही दोषी नहीं, उसका परिवार भी शामिल है। उनको भी पुलिस जेल भेजे।
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