प्रशासक बनाए जाने के बाद गौरव चौधरी बोले, सरकार ने दिया अधिक कार्य करने का अवसर
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। उप्र सरकार ने जिला पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने पर पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बना दिया। हालांकि अब बोर्ड बैठक नहीं होगी। किसी भी नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसला लेना का अधिकार नहीं होगा। प्रशासक ऐसे प्रस्तावों को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजेंगे। वहां से स्वीकृति के बाद ही नीतिगत निर्णय के कार्य हो सकेंगे।
जिला पंचायत का पांच साल का कार्यकाल 11 जुलाई को खत्म हो गया। सरकार ने एक दिन पहले ही 10 जुलाई को आदेश जारी करके जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया। नई जिला पंचायतों की बैठक के लिए नियत की जाने वाली तारीख तक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक ही प्रशासक रहेंगे। सरकार ने यह व्यवस्था जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों को यथावत चलाने के लिए की है। प्रशासकों को इस कार्यकाल में कोई नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा।
इस संबंध में जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी का कहना है कि जिले का विकास उसी गति से होगा, जिस गति से पहले होता चला आ रहा है। प्रशासक बनाकर सरकार ने हमें और अधिक कार्य करने का अवसर दिया है। बड़े वित्तीय फैसले पहले भी डीएम के माध्यम से शासन को भेजे जाते थे।