संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। मेरठ-बागपत हाईवे पर सोमवार को हुए भीषण बस अग्निकांड में नए खुलासे हुए हैं। प्राथमिक जांच में सामने आया कि बस में आग सीएनजी पाइप लीकेज के कारण लगी थी। इस हादसे में यात्रियों की जान तो बच गई लेकिन अब बस के संचालन और उसकी वैधता को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है।
मेरठ-बागपत हाईवे पर गांव कुराली के पास बागपत से मेरठ जा रही प्राइवेट बस में सोमवार को आग लग गई थी। बस में सवार 35 यात्रियों ने किसी प्रकार कूद कर जान बचाई थी। आग से पूरी बस जल गई थी। हादसे के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने बस मालिक से बस के सभी वैध दस्तावेज मांगे हैं। पुलिस मुख्य रूप से बस के फिटनेस सर्टिफिकेट की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या सड़क पर दौड़ने के लिए बस तकनीकी रूप से सुरक्षित थी या नहीं। पुलिस इस बिंदु पर भी गहनता से जांच कर रही है कि निजी बस का रंग और बनावट सरकारी रोडवेज विभाग की बसों से मिलती-जुलती क्यों रखी गई थी। यह आशंका जताई जा रही है कि यात्रियों को भ्रमित करने के लिए सरकारी बसों जैसा रूप दिया गया था।
वहीं, इस मामले में रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक मेरठ क्षेत्र संदीप नायक ने स्पष्ट किया कि दुर्घटनाग्रस्त बस उनके विभाग की नहीं थी। उन्होंने बताया कि यह एक निजी बस थी, जिसका रोडवेज से कोई संबंध नहीं है। सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच में आया है कि बस में आग सीएनजी पाइप लीकेज होने के कारण लगी थी।