माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। शास्त्रीनगर नई सड़क स्थित भोलेश्वर मंदिर में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में कथा व्यास पंडित रामप्रकाश शास्त्री ने भागवत की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत वेद रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ फल है। इसमें केवल रस ही रस है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा जीवन को देवत्व की ओर ले जाने वाली दिव्य धारा है।
कथा के दौरान ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास ने बताया कि तिरस्कार से आहत होकर ध्रुव वन में तपस्या करने चले गए। मार्ग में देवर्षि नारद ने उन्हें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उपदेश दिया। ध्रुव ने छह माह तक कठोर तप कर भगवान श्रीहरि के साक्षात दर्शन प्राप्त किए।
उन्होंने कहा कि बाल्यकाल से ही बच्चों को संस्कार और भक्ति का मार्ग देना चाहिए। जिस प्रकार वर्षा के अभाव में फसलें नष्ट हो जाती हैं, उसी प्रकार संस्कारों के बिना पीढ़ियां बर्बाद हो जाती हैं। माता, पिता एवं बुजुर्गों की सेवा से पितृ ऋण, श्रेष्ठ ग्रंथों के अध्ययन से गुरु एवं ऋषि ऋण तथा यज्ञ, सत्य और सदाचार से देव ऋण से मुक्ति मिलती है।
शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा मानव को देवता बनाने का माध्यम है। अनेक योनियों में भटकने के बाद प्राप्त मानव जीवन को देवत्व की ओर अग्रसर करना ही भागवत का उद्देश्य है। इस अवसर पर अशोक गोयल, आलोक सिसोदिया, नितिन गोयल, राजेंद्र गोयल, गोविंद गोयल सहित अन्य मौजूद रहे।