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शहीदों के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव

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शहीद गांव भामोरी का बदहाल तालाब - फोटो : SARDANA
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शहीदों के गांव में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव
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18 अगस्त 1942 को हुआ था मिनी जलियावाला बाग कांड
- देश की आजादी के बाद आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित, भामौरी के ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
सरधना। शहीद गांव भामौरी में प्रति वर्ष 18 अगस्त को शहीद दिवस मनाया जाता हैं। शहीद गांव भामौरी में देश की आजादी के द्वारा सन् 1942 में मिनी जलियावाला बाग कांड हुआ था। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान पुलिस ने मोटो की चौपाल पर चल रही क्रांतिकारियों की सभा पर गोलियां बरसा दीं थी। मोटो की चौपाल पर पंडित रामस्वरूप सभा को संबोधित कर रहे थे कि अंग्रेजों की उसी भनक लगी तो उन्होंने भामौरी गांव को घेर लिया था। उस समय अंग्रेज दरोगा ने रामस्वरूप से भाषण रोकने को कहा तो उस पर पंडित रामस्वरूप ने कहा कि चाहे उनकी जान चली जाये लेकिन भाषण नहीं रुकेगा। जिस पर पुलिस ने उन पर वहीं गोलियंा दांग दी। जिसमें वह शहीद हो गए। पुलिस पं.रामस्वरूप का शव उठाकर ले जाने लगी, भीड़ ने विरोध किया। अंग्रेज पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिससे भामोरी निवासी प्रह्लाद सिंह, लटूर सिंह, बोबन सिंह व फतेह सिंह भी शहीद हुए थे। दर्जनों क्रांतिकारी घायल हुए थे। पं.रामस्वरूप के शहीद होने पर ब्रिटिश सरकार ने उनका शव परिजनों को नहीं सौंपा। भामौरी में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को शहीद दिवस मनाया जाता है। ग्रामीणों को आज भी उम्मीद है, कि उनके शहीद गांव में चहुमुखी विकास होगा। लेकिन सरकार की उपेक्षा के कारण गांव हाल बेहाल है। साफ सफाई के अभाव में शहीदों की याद में बनवाया तालाब भी अटा हुआ है। सड़कों पर भी गंदगी फैली है। पेयजल आपूर्ति के लिये पानी की टंकी तो है, लेकिन जगह जगह पाइप लाइन में लीकेज होने से पानी सुचारू सप्लाई नहीं होता। ग्रामीणों की मांग है कि इस शहीद गांव को मूलभूत सुविधाएं तो प्रदान की जाएं।

भामोरी में शहीद स्मारक स्थल- फोटो : SARDANA

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