हस्तिनापुर में पांडव टीले पर सफाई करते मजदूर।
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हस्तिनापुर(मेरठ)। महाभारतकालीन ऐतिहासिक नगरी में मौजूद उलटा खेड़ा पांडव टीले पर पुरातत्व विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेश पर साफ सफाई का कार्य शुरू कराया गया। इस दौरान पहले उत्खनन के दौरान मिली प्राचीन दीवारें भी दिखने लगीं।
उलटा खेड़ा पांडव टीले को संरक्षित करने का कार्य शुरू हो चुका है। यहां पुरातत्व विभाग के कार्यालय को भी चमका दिया गया है। वहीं पुरातत्व विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा पांडव टीले पर सफाई का कार्य शुरू कराया गया। मजदूरों ने सन 1950-52 में हुए उत्खनन की जगह पर साफ सफाई की। इस दौरान एएसआई द्वारा तैनात कर्मचारी अरविंद राणा के नेतृत्व में पूरा कार्य हुआ। टीले पर नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शोभित यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि सफाई के दौरान यहां कई प्राचीन दीवारों के अवशेष देखने को मिले हैं। जो दीवारें उत्खनन में प्राप्त हुई थी वह सफाई होने से आज स्पष्ट रूप से दिखने लगी हैं। यहां कुछ दिन पूर्व लगभग दो हजार साल प्राचीन मृदभांड भी प्राप्त किए गए थे। इसके बाद विभाग उत्खनन के लिए भी सक्रिय हो गया है। प्रियंक का कहना है कि उम्मीद है की अब जल्द हैं उत्खनन पर भी बात बन जाएगी। प्रियंक ने हस्तिनापुर पर पांडव टीले पर उत्खनन के लिए जनहित याचिका भी दाखिल की थी।
पांडव टीले पर सफाई के दौरान मिली प्राचीन दीवार। - फोटो : MAWANA