फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: एसआईआर में कटे पांच लाख वोटों ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की धड़कनें

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले मेरठ जिले में मतदाता सूची के शुद्धिकरण ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। दरअसल, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत जिले की मतदाता सूची से 2.48 लाख महिलाओं और 2.57 लाख पुरुषों के नाम हटाए गए हैं। कुल 5.06 लाख वोटों की यह कटौती आगामी विधानसभा चुनाव में हार-जीत के अंतर को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।
विज्ञापन

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2.48 लाख महिला वोटरों का नाम हटना साइलेंट वोटर के गणित को बिगाड़ सकता है। पश्चिमी यूपी में कई सीटें 5,000 से 15,000 वोटों के अंतर से जीती जाती हैं। जब एक ही सीट से 50 हजार से एक लाख वोट कट जाएं तो पुराना चुनावी डेटा बेकार हो जाता है। नए सिरे कवायद करनी पड़ती है। वैसे मेरठ की सातों सीटों पर चुनाव प्रचार से ज्यादा जोर राजनीतिक दलों का नाम जुड़वाने पर रहा है। पऱशासनिक अधिकारियों के मुताबिक इस छंटनी के पीछे मुख्य कारण पलायन, पता बदलना, मतदाता की मृत्यु और दोहरा पंजीकरण है।

मेरठ कैंट: सबसे व्यापक असर पड़ा
तथ्यों पर गौर करें तो सबसे व्यापक असर मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर पड़ा है। यहां से सर्वाधिक 64,679 पुरुष और 57,036 महिला मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। कैंट विधानसभा पारंपरिक रूप से भाजपा का गढ़ रही है लेकिन सवा लाख के करीब वोटों का कम होना यहां के मार्जिन पर सीधा प्रहार कर सकता है।
विज्ञापन


एक-एक वोट कीमती है
मेरठ दक्षिण सीट पर 55,892 महिलाओं और 62,383 पुरुषों के नाम हटे हैं। यह सीट अक्सर नजदीकी मुकाबले वाली रही है, ऐसे में 1.18 लाख वोट कम होना निर्णायक साबित होगा। मेरठ शहर सीट पर 29,533 महिला और 32,191 पुरुष मतदाता सूची से बाहर हुए हैं। यह सीट सांप्रदायिक और ध्रुवीकरण की राजनीति के लिए जानी जाती है जहां एक-एक वोट की कीमत होती है।
देहात के सीटें भी नींद उड़ानी वाली
सिवालखास, सरधना, हस्तिनापुर और किठौर की सीटों पर भी औसतन 50 हजार से 60 हजार वोट कटे हैं। सरधना और किठौर जैसी सीटों पर जहां जीत का अंतर पिछले चुनाव में कम था वहां यह कटौती प्रत्याशियों की नींद उड़ाने वाली है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें