गुरूकुल प्रभात आश्रम टीकरी में आयोजित गोष्ठी में हिस्सा लेते हुए विद्ववान
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देश की 18 विश्वविद्यालयों के 150 विद्वानों ने लिया संगोष्ठी में भाग
जानीखुर्द। गुरुकुल प्रभात आश्रम टीकरी में स्वामी समर्पणानंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का रविवार को समापन हो गया। संगोष्ठी में देश के अलग अलग स्थानों से आये विद्वानों ने अपने शोध पढे़।
शोध संगोष्ठी के अंतिम दिन शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों से पधारे विद्वानों का गुरुकुलीय परंपरानुसार उत्तरीय, श्रीफल, माला व शंख वादन द्वारा स्वागत किया गया। प्रो. मानसिंह प्रात: कालीन सत्र के अध्यक्ष रहे। इस सत्र में दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ. सत्यपाल सिंह, डॉ. धनंजय कुमार आचार्य, डॉ सोमवीर, डॉ जगमोहन आदि विद्वान उपस्थित हुए। सारस्वत अतिथि मृगेंद्र विनोद, आनंदवन वाराणसी ने कौषीतकि ब्राह्मण के आधार पर भारतीय सभ्यता की प्राचीनता को सिद्ध किया। इस सत्र का संयोजन डॉ योगेंद्र भानू, राजस्थान ने किया। भोजनोपरांत सत्र के अध्यक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय से पधारे डॉ भारतेंदु पांडेय रहे। डॉ दयाशंकर तिवारी, सारस्वत अतिथि एवं डॉ विजयशंकर द्विवेदी, दिल्ली विवि से डॉ करुणा आर्या, डॉ नंदिनी, डॉ वरुण, डॉ. वेदव्रत गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय आदि मौजूद रहे। सत्र का संयोजन डॉ विनोद ने किया। दिल्ली से पधारे प्रो. केदारनाथ परोहा समापन सत्र के अध्यक्ष रहे। गुरुकुल प्रभात आश्रम के कुलाधिपति परमपूज्य स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी का आशीर्वाद वचन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन का सर्वप्रथम उद्देश्य होता है जनजागरण और दैवी संस्कृति के प्रचार में संलग्न लोगों के उत्साह को बढ़ाना। अत: इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन होते रहने चाहिए। इस शोध संगोष्ठी में देश के 18 विश्वविद्यालयों से आये 150 विद्वानों ने हिस्सा लिया। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष एवं गुरुकुल प्रभाताश्रम के मंत्री डॉ. वाचस्पति मिश्र ने कार्यक्रम में आये सभी विद्वानों का धन्यवाद किया।