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Meerut News: फूस की छत, मिट्टी की दीवार, गमजदा परिवारों को आर्थिक मदद की दरकार

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मेरठ। लोहियानगर में पटाखा फैक्टरी में विस्फोट में मारे गए पांच मजदूरों के शव के साथ जिंदगीभर का रंजोगम लेकर घर लौटे परिजनों की आंखों के आंसू सूख नहीं पा रहे हैं। इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। कच्चे मकानों में जीवन व्यतीत कर रहे व्यवस्था के मारे इन परिवारों को अब शासन से आर्थिक मदद की दरकार है।
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लोहियानगर के एम-ब्लॉक में 17 अक्तूबर की सुबह हुए भीषण विस्फोट में बिहार निवासी मजदूर प्रयाग साह, चंदन, सुनील, अयोध्या राम, रूपन साह की मौत हो गई थी। दो दिन बाद बृहस्पतिवार को मेरठ पहुंचे परिजन मोर्चरी पहुंचे और शवों की शिनाख्त की। यहां से वापस लौटते हुए परिजनों की आंखों में आंसू के साथ शासन से आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद भी थी। पुलिस-प्रशासन की ओर से 50 हजार रुपये और शवाें को ले जाने के लिए बस का इंतजाम किया गया था। परिजन आर्थिक मदद की मांग अधिकारियों से कर रहे थे। सीओ कोतवाली अमित कुमार राय ने उन्हें आश्वासन दिया था कि जांच पूरी होने पर शासन की ओर से आर्थिक मदद मिलेगी। लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं थे। इस पर उन्होंने हंगामा भी किया था और मोर्चरी के बाहर सड़क पर बैठ गए थे। पुलिस ने सख्ती कर उन्हें उठाया था। पुलिस ने मृतकों का अंतिम संस्कार मेरठ में ही करने की बात कही थी, लेकिन परिजनों ने इससे इन्कार कर दिया और रोते-बिलखते शव लेकर बिहार रवाना हो गए। सभी मृतकों के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजाेर है। वह मिट्टी की दीवार के बीच और फूस की छत के नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परिवार के कमाने वालों की मौत के अब रोजी-रोटी का संकट भी परिवार पर खड़ा हो गया है। ऐसे में पीड़ित परिवार शासन से जल्द आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं।
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