बेसिक शिक्षा विभाग ने कागजातों का विश्वविद्यालय में वेरीफिकेशन कराया तो जवाब मिला कि छात्रा का कोई रिकॉर्ड विवि के पास नहीं है। बीएसए ने संगीता की तनख्वाह रोक दी। संगीता ने 20 से ज्यादा आरटीआई लगाईं, तमाम दलीलें दी, लेकिन विवि में कोई सुनवाई नहीं हुई। इस बीच 12 रजिस्ट्रार बदल गए। बेसिक शिक्षा विभाग ने संगीता की बर्खास्तगी तक के आदेश जारी कर दिए।
संगीता ने रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा को अपनी समस्या बताई। रजिस्ट्रार ने कर्मचारी से सख्ती से जानकारी मांगी तो संगीता का पूरा रिकॉर्ड मिल गया। डाटा मिलते ही संगीता की मार्कशीट बनवा दी गई। सोमवार को संगीता अपने पति और दो छोटी बच्चियों के साथ डिग्री लेने विवि पहुंचीं। रजिस्ट्रार ने बेसिक शिक्षा विभाग के कागजों का भी वेरीफिकेशन करा दिया। डिग्री पाकर संगीता की आंखों नम हो गईं। उन्होंने रजिस्ट्रार को धन्यवाद कहा।
छह मामलों का कराया निपटारा
संगीता के अलावा दो अन्य शिक्षिकाएं भी इसी कॉलेज की थीं। इनमें एक नीरू चौधरी और दूसरी रुचि हैं। ये दोनों भी शिक्षिका हैं। इनकी भी नौकरी पर बन आई थी। इनकी भी डिग्री बनवा दी गई है। ये शाहजहांपुर में तैनात हैं। इसके अलावा दो अन्य छात्र और भी थे।
अपना कार्य जिम्मेदारी से करें
ये ऐसा काम नहीं था कि जो हो नहीं सकता था। ठीक है, रिकॉर्ड नहीं मिल रहा था लेकिन दूसरी जगहों से इसे निकलवाया जा सकता था। कुलपति के निर्देश हैं कि किसी भी छात्र-छात्रा को परेशानी नहीं होनी चाहिए। हमने अपना काम जिम्मेदारी से किया तो सारा डाटा मिल गया। - धीरेंद्र कुमार वर्मा, रजिस्ट्रार चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ