- बच्चों की त्वचा और नाखूनों में पीलापन आने लगता है।
- आंखें और जीभ भी पीली पड़ने लगती है।
- ऊपरी जबड़े में दोष आ जाता है।
- आंतों में विषमताएं आने लगती हैं।
- दांत निकलने में काफी कठिनाई होने लगती है।
- बच्चे का विकास एकदम रुक जाता है।
ऐसे करें बचाव
- रक्त परीक्षण करवाकर इस रोग की उपस्थिति की पहचान कर लेनी चाहिए।
- शादी करने से पूर्व लड़का एवं लड़की के रक्त का परीक्षण अवश्य करवाएं।
- गर्भधारण के चार महीने के अंदर भ्रूण का परीक्षण कराना चाहिए।
सामान्य रूप से शरीर में लाल रक्त कणों की उम्र करीब 120 दिनों की होती है। परंतु थैलेसीमिया के कारण इनकी उम्र सिमटकर महज 20 दिन की हो जाती है। इसका सीधा असर शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन पर पड़ता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम हो जाने से शरीर दुर्बल हो जाता है और अशक्त होकर हमेशा किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहता है। मरीज को हर 15 से 30 दिन में खून बदलवाना पड़ता है।- डॉ. नवरत्न, थैलेसीमिया वार्ड इंचार्ज
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