ठा. संगीत सोम
प्रदेश में बहुमत आने के बाद अब भाजपा विधायकों की जद्दोजहद मंत्री पद पाने की है। सभी नेताओं ने अपनी पैरवी भी शुरू कर दी है। जातिगत समीकरणों का भी हवाला दिया जा रहा है। देखा जाए तो भाजपा की प्रदेश में बंपर जीत की पटकथा पश्चिम के जिलों से ही रखी गई। अब उसी तरह से पश्चिम से दिग्गज नेताओं की कतार भी है। मेरठ सहित आसपास के छह जिलों की 34 सीटों में से भाजपा ने 26 पर कब्जा किया है। ऐसे में मुख्यमंत्री कौन होगा, इसके साथ ही मंत्रियों की संख्या और उनके नामों पर भी नजर है।
इन छह जिलों पर सबकी नजर
मेरठ के साथ ही सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बागपत और शामली में 34 विधानसभा सीट हैं। भाजपा के पास इन जिलों में कई कद्दावर नेता हैं। फायर ब्रांड युवा चेहरों में सरधना से संगीत सोम, थाना भवन से सुरेश राणा और नूरपुर से ठा. लोकेंद्र चौहान हैं। ये तीनों ही नेता ठाकुर हैं और सभी की मजबूत दावेदारी है। तीनों ही दूसरी बार चुने गए हैं और अपने चुनाव के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी लगातार सक्रिय रहे हैं। वहीं वैश्य बिरादरी से मुजफ्फरनगर के कपिल अग्रवाल और मेरठ कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल के बीच खींचतान होगी। सत्यप्रकाश अग्रवाल चौथी बार तो कपिल अग्रवाल दूसरी बार विधायक बने हैं। सहारनपुर की नकुड़ सीट से जीते पूर्व मंत्री डा. धर्म सिंह सैनी की पैरोकारी भी मजबूत मानी जा रही है। धर्म सिंह सैनी बसपा सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इनके बीच गुर्जर बिरादरी को भी भाजपा प्रतिनिधित्व देगी तो मीरापुर से विधायक निर्वाचित हुए अवतार सिंह भड़ाना और दक्षिण से जीते डॉ. सोमेंद्र तोमर में से किसी का भी दावा होगा। डॉ. सोमेंद्र तोमर को युवा होने का लाभ मिल सकता है। भाजपाइयों का मानना है कि पश्चिम के इन छह जिलों में से मंत्रिमंडल में अधिकतम आधा दर्जन विधायकों को जगह मिलेगी। जिनमें एक-दो कैबिनेट और बाकी राज्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो मंत्रिमंडल को छोटा और प्रभावी रखने पर केंद्रीय नेतृत्व जोर दे रहा है।