बताया कि जांच के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। जिसकी सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या आठ) ललिता गुप्ता की कोर्ट में हुई। न्यायालय ने साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर शौकीन को दुष्कर्म का दोषी पाया। जिसके चलते शौकीन को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 32000 रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है।
पॉक्सो एक्ट के 10 गंभीर मामले हुए थे चिह्नित
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने पॉक्सो एक्ट के मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने के लिए मजबूत पैरवी करने का निर्देश दिया था तथा प्रत्येक रेंज स्तर पर 10 मामले चिह्नित कर मजबूत पैरवी कराने के लिए डीआईजी को निगरानी करने का निर्देश दिया था।
सहारनपुर रेंज से भी दस मामले चिह्नित किए गए थे, जिनमें सहारनपुर से चार, मुजफ्फरनगर से तीन और शामली जनपद से भी तीन मामले चिह्नित किए गए थे। अपर निदेशक अभियोजन, जिला शासकीय अधिवक्ता और तीनों जनपद के मॉनीटरिंग सेल प्रभारियों और पैरोकारों की बैठकें कराकर मजबूत पैरवी शुरू कराई गई थी। इसी का परिणाम है कि चिह्नित मामलों में सहारनपुर के मंडी कोतवाली पर फरवरी 2017 में दर्ज बहला फुसलाकर अपहरण और दुष्कर्म के मामले में पैरवी कराई गई।
अन्य मामलों में भी कराई जा रही पैरवी : डीआईजी
डीआईजी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि मंडी कोतवाली पर दर्ज मामले में मजबूत पैरवी के चलते आरोपी को सजा हुई। इसके लिए पैरोकार हेड कांस्टेबल सुधीर कुमार को एक हजार रुपये नकद पुरस्कार दिया गया है। सहारनपुर रेंज से पॉक्सो एक्ट के चिह्नित अन्य मामलों में भी मजबूत पैरवी कराई जा रही है, ताकि आरोपियों को सजा दिलाई जा सके।