उत्तर प्रदेश के बदायूं में उप कोषागार में स्टांप बिक्री के करीब पांच करोड़ रुपये के गबन के मामले में शासन ने कैराना के तहसीलदार रनबीर सिंह को निलंबित कर दिया। उन्हें बरेली में मंडलायुक्त कार्यालय से अटैच किया गया है। वे कैराना में करीब डेढ़ साल से अधिक समय तक तैनात रहे।
तहसीलदार रनबीर सिंह की कैराना में छह जून 2018 को तैनाती मिली थी। तब से वे कैराना तहसीलदार के पर कार्यरत रहे। शुक्रवार को शासन ने तहसीलदार रनबीर सिंह को निलंबित कर उन्हें कैराना से हटाकर बरेली में मंडलायुक्त कार्यालय से अटैच कर दिया है। डीएम अखिलेश सिंह ने उनके स्थान पर प्रवीण कुमार को कैराना तहसीलदार पद पर भेजा है। बताया गया है कि 22 सितंबर 2015 से 13 सितंबर 2016 तक रनबीर सिंह बदायूं में तहसीलदार के पद पर तैनात रहे हैं। बदायूं कोषागार में स्टांप बिक्री को लेकर करीब पांच करोड़ के गबन के मामले का खुलासा पिछले साल नवंबर 2019 में हुआ था। इस मामले में 18 नवंबर 2019 को उपकोषागार के दो खजांची और एकाउंटेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उस दौरान तहसीलदार पद पर होने के नाते रनबीर सिंह के खिलाफ भी जांच चल रही थी। इसी मामले में उन्हें निलंबित किया गया है।
बदायूं उपकोषागार में स्टांप बिक्री में करीब पांच करोड़ का गबन होने के समय में तहसीलदार रनबीर सिंह की बदायूं में पोस्टिंग थी। इस मामले में उनके खिलाफ जांच चल रही थी। शासन ने उन्हें निलंबित कर मंडलायुक्त कार्यालय बरेली में अटैच किया गया है। तहसीलदार को निलंबन आदेश रिसीव करा दिया गया है।
- अखिलेश सिंह, डीएम।
बदायूं उपकोषागार में स्टांप बिक्री के मामले में दो लोगों पर करीब पांच करोड़ का गबन करने के मामले में एफआइआर दर्ज हुई थी। उस समय वे वहां पर तहसीलदार पद पर तैनात थे। इस मामले की जांच चल रही है। शासन द्वारा उन्हें निलंबित करने की जानकारी मिली है। तैनाती के दौरान उन्हें किसी तरह के गबन के मामले की जानकारी नहीं हुई थी।
- रनबीन सिंह, तहसीलदार।
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