नोटबंदी के एलान को 30 दिन हो चुके हैं। इस अवधि में करेंसी को लेकर मची मारामारी और बैंकों से पूरी तरह धन की निकासी न होने से उद्योग और व्यापार का सिस्टम पूरी तरह गड़बड़ा गया। ट्रांसपोर्टर सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे हैं। इस एक माह में व्यवस्था सुधार की तरफ सिर्फ बड़े व्यापारी ही बढ़ते नजर आये। बाकी छोटे दुकानदार और छोटी औद्योगिक इकाईयां अभी भी पूरी तरह प्रभावित नजर आ रही हैं।
उद्योग की टूटी कमर
नोट बंदी से औद्योगिक इकाईयों की कमर टूट गयी है। यहां खेल, कैंची, बैंड बाजा, हैंडलूम, ट्रांसफार्मर, इलेक्ट्रिकल इक्यूपमेंट, मीट व्यापार, ऑटो पार्ट्स, प्रकाशन, कृषि यंत्र सहित अन्य सामान बनाने की छोटी-बड़ी करीब 20 हजार इकाईयां हैं। इनमें मात्र 10 प्रतिशत ही ऐसी औद्योगिक इकाईयां हैं, जो ऑर्गेनाइज्ड सिस्टम के तहत संचालित है। इन्हीं इकाईयों में अधिकांश ट्रांजक्शन कैशलैस होता है। लेकिन बाकी इकाईयों में नगद भुगतान पर ही काम चलता है। नोट बंदी के बाद से इन्हीं इकाईयों पर सबसे ज्यादा असर आया है। वर्तमान में सैकड़ों छोटी इकाईयां जहां लगभग बंद हो चुकी हैं, तो जो चल रही हैं, उनमें भी उत्पादन लगभग बंद ही है। आईआईए सूत्रों के अनुसार जिले में करीब दो हजार करोड़ रुपये प्रतिमाह का टर्नओवर है। जो 70 प्रतिशत तक गिर चुका है। टर्नओवर मात्र 600 करोड़ का रह गया है।
समस्या ज्यादा गंभीर होगी
सरकार का कदम और उसकी मंशा सराहनीय है। लेकिन इसे लागू करने में भारी खामियां हुई है। यदि कैश फ्लो की व्यवस्था नहीं सुधरी तो समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाएगी। इसे जल्दी ही नार्मल करना पड़ेगा। क्योंकि जितनी देर होगी, उतना ही औद्योगिक इकाईयां पिछड़ती चली जाएंगी। जिन्हें दोबारा खड़े होने में भारी परेशानी और मशक्कत करनी पड़ेगी।- पंकज गुप्ता, प्रदेश महासचिव आईआईए
व्यापार चौपट और व्यापारी परेशान
नोट बंदी के बाद से पूरा व्यापार नहीं उबर पाया। छोटे और गांव देहात के व्यापारी अभी तक नोट बंदी की मार झेल रहे हैं। जिले में ज्वैलरी, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, दवा, कपड़ा, रेडीमेड गारमेंट, जूता, बर्तन, भवन निर्माण सामग्री, पेंट आदि का थोक, फुटकर का बड़ा व्यापार है। महीने का औसतन टर्नओवर करीब तीन हजार करोड़ रुपये बैठता है। जो नोट बंदी के पहले सप्ताह में जहां 90 प्रतिशत तक गिरा, तो उसके बाद लगातार उभरने के बाद भी आज 50 प्रतिशत कम है। नोट बंदी के बाद से स्थानीय व्यापार को करीब 16 सौ करोड़ की सीधी चपत लगी है। कैश की किल्लत से सबसे ज्यादा प्रभावित सराफा, भवन निर्माण और पेंट आदि का व्यापार हुआ है।
तब तक व्यापार नहीं सुधरेगा
प्रधानमंत्री का अच्छा निर्णय था। लेकिन योजना के क्रियान्वयन में सरकार विफल रही और एक अच्छी योजना परेशानी का सबब बन गयी। प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और रिजर्व बैंक 500 और 1000 के 15 लाख करोड़ रुपये होने की बात कर रहे थे, जिसमें अब तक करीब 13 लाख करोड़ जमा हो चुका है। ऐसे में मात्र दो लाख करोड़ के पीछे जनता को परेशान करना ठीक नहीं था। जबकि अभी 31 दिसंबर का समय पूरा होने में 22 दिन शेष बचे हैं। जब तक बाजार में नगद धनराशि पर्याप्त नहीं आएगी, व्यापार नहीं सुधरेगा।
थम गए ट्रकों के पहिये
यहां ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से करीब पांच सौ से ज्यादा लोग जुडे़ हैं। ट्रांसपोर्टरों की मानें तो एक माह में ट्रांसपोर्ट कारोबार में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का टर्नओवर होता है। नोटबंदी के बाद बैंक से पर्याप्त धनराशि न निकलने से इस व्यवसाय पर सबसे ज्यादा गाज गिरी है। क्योंकि बैंक से चालू खाते से 50 हजार की निकासी की लिमिट तय की गयी है। लेकिन यह 50 हजार भी बैंकों से आज तक मिल नहीं रहे हैं। नगदी की समस्या के कारण ट्रक ऑपरेटर परेशान हैं। एक ट्रक यदि 500 किमी से ज्यादा की दूरी पर माल लेकर निकलता है तो उसके चालक को ट्रक मालिक पचास हजार रुपये तक देकर भेजता है। यहां 50 से ज्यादा ट्रांसपोर्टरों पर 20-50 तक ट्रक हैं। जबकि बाकी ट्रांसपोर्टर के पास ट्रक के साथ छोटे माल वाहक वाहन भी हैं। नोट बंदी के बाद इन सबका व्यापार घटकर 20 प्रतिशत रह गया है। इस एक माह में बीस करोड़ का टर्नओवर ही ट्रांसपोर्ट कारोबारी कर पाये हैं।