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मृत्युंजय अस्पताल की जांच करने पहुंची एमडीए और तहसील की टीम

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मृत्युंजय अस्पताल की जांच करने पहुंची एमडीए और तहसील की टीम
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मेरठ। सरकारी जमीन में बने मृत्युंजय अस्पताल पर जांच शुरू हो चुकी है। साथ ही सिस्टम की साठगांठ भी नजर आने लगी है। मंगलवार को तहसील लेखपाल ने जहां पैमाइश करते हुए खसरा नंबर ही दूसरा बताना शुरू कर दिया तो एमडीए की तरफ से भी नक्शा स्वीकृत होने की बात कही जा रही है। लेकिन इस पूरे मामले में कई सवाल ऐसे हैं, जिसका जवाब अभी भी नहीं मिल रहा है।
बेगमपुल रोड के छिपी टैंक तिराहे के पास खसरा नंबर-373 नजूल में दर्ज है। जिसका रकबा करीब 10 हजार वर्ग मीटर है। इस जमीन के 1620 वर्ग मीटर हिस्से पर मृत्युंजय अस्पताल बना हुआ है। इस अस्पताल का नक्शा आवासीय निर्माण के तहत स्वीकृत कराया था। हालांकि बाद में अस्पताल मालिक डा. शचिंद्र शेखर ने एमडीए में शमन कराने के लिए आवेदन किया था। जिसमें उन्होंने सभी शर्ताें को पूरा करने के लिए शपथ पत्र भी दिया था। इन शर्तोें में एक शर्त अस्पताल में अवैध रूप से तैयार किए गए बेसमेंट को बंद करने की भी थी, जो आज तक बंद नहीं हुआ है। इसके अलावा पार्किंग की कोई व्यवस्था इस अस्पताल में आज तक नहीं हुई है।
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वहीं, दूसरी तरफ अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के निर्देश पर तहसील से लेखपाल भी अस्पताल की पैमाइश की खानापूर्ति करने पहुंचे और बाहर निकल कर उन्होंने बताया कि अस्पताल खसरा नंबर 374 में बना है। जो निजी जमीन है। जबकि तहसील के सजरे को यदि देखें तो स्पष्ट नजर आता है कि मृत्युंजय अस्पताल जिस जमीन पर बना है, वह खसरा नंबर 373 में है।
- तहसील की साठगांठ से गुम हो रही सरकारी संपत्ति
शहर के भीतर कई मामले अभी तक सामने आ चुके हैं। जिनमें सरकारी जमीन को तहसील की साठगांठ से धड़ल्ले से खुर्द बुर्द किया जा रहा है। शहर में 50 से ज्यादा सरकारी जमीन के नंबर हैं। अधिकांश पर कब्जे हैं, लेकिन तहसील लेखपाल उस जगह को निजी खसरे की बताकर अधिकारियों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जिस जमीन की शिकायत हुई है यदि वह निजी है तो सरकारी जमीन कहां पर है? इसका जवाब आज तक कोई प्रशासनिक अधिकारी तहसील कर्मचारियों से नहीं ले पाया है।
वर्जन......
शिकायतकर्ता यदि लेखपाल की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है तो उसकी जांच किसी अन्य एजेंसी से कराई जाएगी। यदि रिपोर्ट में गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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- अनिल ढींगरा, जिलाधिकारी
एमडीए के अवर अभियंता नरेश शर्मा को जांच के लिए भेजा गया था। वह नक्शा लेकर आए हैं, जिसे अभी नहीं देखा है। लेकिन अवर अभियंता ने नक्शा स्वीकृत होने की बात कही है। बुधवार को नक्शा देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी।
- विनीत कुमार, जोनल अधिकारी, एमडीए
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