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मास्टर जी को पसंद नहीं सेल्फी का आदेश  

Thu, 17 Nov 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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व्हाट्स अप लोगो - फोटो : अमर उजाला
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सेल्फी से उपस्थिति दर्ज कराने का आदेश मास्टर जी को मंजूर नहीं है। उन्होंने डीएम के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। इसके विरोध में 18 नवंबर को बेसिक शिक्षा परिषद् के शिक्षकों की बैठक बुलाई गई है। शिक्षकों का तर्क है कि यह शासनादेश नहीं है, इसे मानने के लिए शिक्षक संघ बाध्य नहीं है। वहीं इस योजना के रिजल्ट भी बेहतर सामने आए हैं। डीएम के पास आने वाले शिकायतें कम हो गई हैं, शिक्षक समय से विद्यालय में पहुंचने लगे हैं। बच्चों की संख्या भी बढ़ी है।
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पिछले दिनों डीएम बी. चंद्रकला के पास बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों की तमाम शिकायतें पहुंचीं। इनमें शिक्षकों के समय पर स्कूल न पहुंचने, अनुपस्थित होने पर भी रजिस्ट्रर में साइन होने, बच्चों की कम संख्या होने पर भी मिड-डे मील में ज्यादा बच्चे दर्शाने जैसी तमाम शिकायतें थीं। इन शिकायतों के भौतिक सत्यापन के लिए डीएम ने व्हॉट्सएप ग्रुप बनाकर उसके जरिये सुबह स्कूल खुलने के 15 मिनट बाद शिक्षक-शिक्षिकाओं और बच्चों की एक साथ सेल्फी पोस्ट करने का आदेश दिया था। इस आदेश के तहत ब्लॉक स्तर पर बनाये गये ग्रुप में सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सुबह फोटो पोस्ट करना था, जिसकी मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय पर रोजाना हो रही है। इससे रोजाना आने वाले शिक्षकों और बच्चों की संख्या का पता चल रहा है। जहां पर बच्चों के पंजीकरण के अनुपात में बच्चों की संख्या कम है। वहां पर खंड शिक्षा अधिकारियों और बीएसए को स्वयं जाकर मॉनिटरिंग करने का निर्देश है, ताकि बच्चों को प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रेरित किया जा सके। 

मास्टर जी को पसंद नहीं सेल्फी का आदेश  
इस योजना के शुरू होने के कुछ दिन बाद से ही प्राथमिक शिक्षक संघ ने विरोध करना शुरू कर दिया था। इस संबंध में कई बार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र देकर उस शासनादेश को मांगा गया, जिसमें व्हॉटसएप पर सेल्फी पोस्ट करने का आदेश हो। लेकिन बीएसए शासनादेश नहीं दे पाये। शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार और महामंत्री सविता शर्मा ने बताया कि 18 नवंबर को बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया जाएगा। शिक्षक बीएसए के किसी मौखिक निर्णय को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।
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योजना के परिणाम बेहतर आए 
डीएम कार्यालय के अनुसार इस योजना के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। अब स्कूलों में शिक्षक समय से आने लगे हैं। स्कूलों में बच्चों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। पढ़ाई का स्तर भी सुधरा है। साथ ही मिड-डे मील में भी गड़बड़ी अब नहीं हो पा रही है। व्यवस्था से शिक्षकों की मनमानी रुक गई है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।

यह योजना डीएम द्वारा सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधार के लिए शुरू की गई है। शिक्षकों के किसी विरोध की जानकारी नहीं है, लेकिन यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो अनुशासनहीनता माना जाएगा। इस पर नियमानुसार कार्रवाई होगी। - दिनेश चंद्र, प्रभारी जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी प्रशासन
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