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किशोरों की मनोस्थिति जांचेंगे विशेषज्ञ

Sun, 03 Apr 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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फाइल - फोटो : फाइल
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जघन्य अपराध के मामलों में किशोरों को सजा देने से पहले उनकी मनोस्थिति का आंकलन होगा। किशोर न्याय बोर्ड में सुनवाई के दौरान मनोवैज्ञानिक या समाजशास्त्री मौजूद रहेगा। वह वारदात के दौरान आरोपी की मनोस्थिति और परिस्थितियों पर अपनी राय देगा। बोर्ड द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले में राय की अहम भूमिका होगी। इस काम के लिए शिक्षण संस्थानों के मनोविज्ञान और समाजशास्त्र विभाग के शिक्षकों का पैनल तैयार किया जा रहा है। डीएम ने शिक्षण संस्थानों को पत्र भेजकर एक्सपर्ट के नाम मांगे हैं।
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किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 की धारा 15 (1) के तहत किशोर न्याय बोर्ड द्वारा जघन्य अपराधों में शामिल पाए गए किशोरों के प्रारंभिक निर्धारण के बारे में यह किया जा रहा है। किसी ऐसे बालक द्वारा किए गए जघन्य अपराध जिसकी उम्र 16 साल हो गई है या अधिक है, बोर्ड उसकी मानसिक और शारीरिक क्षमता, अपराध के परिणाम को समझने की योग्यता और जिस परिस्थिति में अपराध किया है, के बारे में प्रारंभिक निर्धारण करेगा।

इस काम में बोर्ड अनुभवी मनोवैज्ञानिक, मनोसामाजिक कार्यकर्ता आदि का मदद लेगा। विशेषज्ञ आरोपी की मनोदशा और उस परिस्थिति पर टिप्पणी करेंगे, जो कि फैसले के लिए अहम होगी। अपराध करने के दौरान वह किसी मानसिक बीमारी का शिकार तो नहीं था, या उसे किसी और ने उकसाया तो नहीं था। इन बिंदुओं पर एक्सपर्ट राय देंगे। डीएम ने इस बारे में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति, मेरठ कॉलेज, आरजी गर्ल्स पीजी कॉलेज, कनोहरलाल गर्ल्स डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखा है। विषय संबंधी प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर उपलब्ध कराने को कहा है। बोर्ड शिक्षकों का एक पैनल तैयार करेगा। उसमें से बारी-बारी से सुनवाई के दौरान शिक्षकों को परामर्श देने के लिए बुलाया जाएगा।
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