वेस्ट यूपी में गुरुजी ही नकल करा रहे हैं। यह खुलासा माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय मेरठ की रिपोर्ट में हुआ है। नकल करा रहे 110 केंद्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ नकल अधिनियम 1998 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। साथ ही नकल कराने के शक में 203 टीचरों की ड्यूटी बदल दी गई है।
यह हालात तब हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभाओं में यूपी बोर्ड में नकल को व्यापार बनाए जाने जैसे सख्त बयान दिए थे। साथ ही सूबे की योगी सरकार ने नकल रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए थे। बावजूद इसके न तो परीक्षार्थी सुधरने को तैयार हैं और न टीचर। शिक्षकों का नकल कराना तो और भी गंभीर मामला है। मेरठ स्थित माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत 17 जिले आते हैं, जिनमें 12 जिलों का नकल को लेकर बुरा हाल है।
अभी तक नकल अधिनियम के तहत अलीगढ़ में सबसे ज्यादा 48 एफआईआर हुई हैं, जबकि मैनपुरी में 34, मथुरा में 14, कासगंज और फिरोजाबाद में 8-8, आगरा में 6, हाथरस में 5, बागपत में 4, एटा में 3, मेरठ और सहारनपुर में 2-2, जबकि बुलंदशहर में एक। हालांकि बृहस्पतिवार तक की इस रिपोर्ट में पांच जिले नकल के मामले में अपवाद भी रहे हैं। इनमें गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, मुजफ्फरनगर और शामली ऐसे हैं, जिनमें नकल को लेकर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बता दें कि यूपी बोर्ड की 16 मार्च से परीक्षाएं शुरू हुई थीं। हाईस्कूल की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, जबकि इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 21 अप्रैल तक चलेंगी।
एफआईआर
जिला केंद्र व्यवस्थापक कक्ष निरीक्षक
अलीगढ़ 14 24
मैनपुरी 08 24
मथुरा 00 14
फिरोजाबाद 06 02
कासगंज 04 04
आगरा 01 05
हाथरस 01 01
बुलंदशहर 00 01
बागपत 01 00
नकल कराने के शक में इनकी ड्यूटी बदली
जिला केंद्र व्यवस्थापक कक्ष निरीक्षक
आगरा 28 32
अलीगढ़ 16 24
मैनपुरी 15 24
हाथरस 04 17
मथुरा 07 05
कासगंज 06 04
फिरोजाबाद 02 06
बुलंदशहर 02 03
मेरठ 02 02
बागपत 01 03
23 परीक्षार्थियों पर भी एफआईआर
23 परीक्षार्थियों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें दो मैनपुरी, तीन एटा, आठ अलीगढ़, तीन हाथरस, दो मेरठ, तीन बागपत और दो सहारनपुर में हुई हैं।