खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग मुस्तैदी के साथ सैंपलिंग में जुटा है, लेकिन पीछे के रास्ते से व्यापक पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है। मिलीभगत का ही नतीजा है कि जौनपुर के एक व्यापारी को यहां तक पता है कि उसकी दुकान से से भरा गया मिठाई का सैंपल मेरठ लैब में है उसका कोड क्या है और वह लैब में किस दिन रिसीव हुआ। यह खुलासा शनिवार को अमर उजाला संवाददाता के स्टिंग में हुआ। ऐसे में विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहा है।
शनिवार को अवकाश था, लेकिन जौनपुर के दो व्यापारी अपनी सैंपल रिपोर्ट को सेट कराने के लिए मेडिकल कॉलेज कैंपस स्थित एफडीए की लैब पहुंचे। जिन्होंने अमर उजाला संवाददाता को एफडीए का ही स्टाफ समझकर लैब के बारे में कुछ जानकारी ली। संवाददाता ने कहा कि आप अपना काम बोलिये। बस फिर क्या था धीरे-धीरे सारा मामला खुलता चला गया। सारे मामले की तह तक जाने के लिए संवाददाता ने कहा कि लैब इंचार्ज से बात करने के बाद ही बता पाऊंगा। ऐसे में उनके घर जाकर ही बात करनी होगी। इस पर जौनपुर के गुड्डू प्रधान और उसके साथी ने कहा आप हमारा नंबर ले लीजिये और बात कर बता दीजिये। इंचार्ज जहां भी मिलेंगे हम उनसे मिलने को तैयार है। उसके बाद संवाददाता ने मोबाइल नंबर लिया और कुछ देर बाद खुद फोन कर लैब इंचार्ज के घर पहुंचने की बात कहकर जानकारी मांगी। दोनों ने फोन पर जो जानकारी दी वो एफडीए की व्यवस्था की पोल खोल रही है।
फोन पर हुई वार्ता के अंश
रिपोर्टर - आपका किस जिले का सैंपल हैं, लैब इंचार्ज पूछ रहे हैं?
गुड्डू प्रधान - साहब जौनपुर जिले का है।
रिपोर्टर - किस चीज के सैंपल हैं ?
गुड्डू प्रधान - दो सैंपल हैं, एक बेसन के लड्डू का और दूसरा बर्फी का।
रिपोर्टर - सैंपल किस तारीख को भरा गया, उसका कोई कोड भी है।
गुड्डू प्रधान - सैंपल 14 अगस्त को भरा गया था, जिनके कोड जेएनपी 6144 व जेएनपी 6172।
रिपोर्टर - इन्होंने अभी अपने रजिस्टर में देखा है ऐसे तो कोई सैंपल नहीं आया है।
गुड्डू प्रधान - नहीं, कोरियर के जरिये दोनों सैंपल यहां पर रिसीव हो चुके हैं, आप दोबारा से चेक करें।
रिपोर्टर - अच्छा थोड़ी देर रुको दोबारा से देखते हैं, वैसे किस दुकान के हैं।
रिपोर्टर - सारे रिकार्ड में देख लिया है, ऐसा कोई सैंपल नहीं है।
गुड्डू प्रधान - लो आप मेरे साथी से बात करों.... हां जी कोरियर के जरिये दोनों सैंपल यहां 21-22 अगस्त में रिसीव हो चुके हैं।
रिपोर्टर - अरे भाई! यहां पर नहीं है, आप कैसे कह सकते हैं।
गुड्डू प्रधान - मुझे जौनपुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने ही जानकारी दी है। उन्होंने सब कुछ पता करने के बाद ही बताया है, अब बस आप बात करो कि कितने में बात बन जायेगी।
रिपोर्टर - अच्छा ये बताओ सैंपल किस दुकान का है?
गुड्डू प्रधान - सैंपल मिठाई की दुकान से भरा गया था।
विभागीय मिलीभगत
ये सारा स्टिंग बता रहा है कि सैंपल भरने के बाद लैब में सारे मामले को मैनेज करने के लिए विभागीय मिलीभगत का खेल चल रहा है। इसी में लैब से लेकर फील्ड में सैंपल भरने भरने वाले के बीच का चैनल साफ हो जाता है। क्योंकि दावा किया जा रहा है कि सैंपल लैब में रिसीव हो चुका है तो इसका मतलब लैब से सारी जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग तक जा रही है।
नहीं दे सकते जानकारी
वहीं एफडीए दावा करता रहा है कि किसी भी व्यापारी को यह जानकारी नहीं दी जा सकती है कि सैंपल किस लैब में जा रहा है। ऐसा करने से रिपोर्ट में घालमेल हो सकता है।