गंगा खादर में हर साल बारिश के दौरान बाढ़ का प्रकोप आता था। गंगा में पानी बढ़ने के साथ ग्राम फतेहपुर प्रेम के पास से गंगा कटान शुरू करते हुए आसपास के गांवों और जंगलों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर देती थी। इससे बचने के लिए वर्ष 2013 में यहां ग्रामीणों की मदद से दो कच्चे तटबंध तैयार किए गए। पहला तटबंध करीब 11 किमी लंबा और दूसरा करीब डेढ़ किमी लंबा है। बल्लियों को गाड़कर उसके साथ प्लास्टिक के बोरों में रेत और पत्थर आदि डालकर यह बड़ा तटबंध तैयार किया गया था। हर साल गंगा में पानी बढ़ता और इस तटबंध को क्षतिग्रस्त करता था। इसके बाद सिंचाई विभाग और ग्रामीण इसकी मरम्मत करा देते थे।
गत वर्ष हुए थे 70 लाख खर्च
गत वर्ष भी हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक ने अपनी विधायक निधि से करीब 70 लाख रुपये खर्च करते हुए इस तटबंध की मरम्मत करायी थी। लेकिन पानी इस कदर तेज था कि इस तटबंध को क्षतिग्रस्त कर दिया। लेकिन इस बार सिंचाई विभाग की लापरवाही इस कदर हावी रही कि मौसम विभाग की तमाम चेतावनियों और लगातार बढ़ते पानी के बावजूद इस तटबंध की पूर्व में मरम्मत नहीं करायी गयी।
नुकसान तो इससे ज्यादा
यह आंकड़ा सिर्फ उन 19 गांवों का है जो सीधे प्रभावित हुए हैं। जबकि इन खेतों में लगे ट्यूबवेल पंप, झोपड़ी आदि के साथ ही परीक्षितगढ़ खादर क्षेत्र में भी सैकड़ों हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसल क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में इस बाढ़ के कहर में डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का नुकसान होने की बात ग्रामीण कर रहे हैं।
स्थायी समाधान का प्रयास होगा
मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया है। वास्तव में बाढ़ से किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई के साथ ही भविष्य में यह नुकसान होने से बचे, इसके शीघ्र ही स्थायी समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। -सुरेश राणा, गन्ना राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार उत्तर प्रदेश सरकार
शीघ्र मिलेगी राहत
अब गंगा के जलस्तर में काफी कमी आ रही है। शनिवार को गंगा में सिर्फ 72 हजार क्यूसेक पानी ही डिस्चार्ज किया गया। यदि बारिश नहीं होती है और पीछे से ज्यादा पानी नहीं आता है तो शीघ्र ही खादर क्षेत्र के लोगों को राहत मिलेगी। -पीयूष कुमार, अवर अभियंता बिजनौर बैराज
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