स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सुखबीर सिंह गौतम को मंगलवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित किया।
133, सेनानी भवन, दुर्गा नगर कैलाशपुरी नौचंदी निवासी सुखबीर सिंह गौतम ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन में महात्मा गांधी के साथ भाग लिया था। आजादी की इस लड़ाई में सुखबीर सिंह गौतम सदैव आगे रहे थे। अंग्रेजों ने उन्हें 17 अगस्त 1941 को गिरफ्तार किया था। तब उन्हें 9 माह की जेल हुई तथा उन पर जुर्माना भी लगाया गया।
98 वर्षीय सुखबीर सिंह गौतम के पुत्र वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर सुशील गौतम ने बताया कि उनके पिता की आंदोलन में सक्रियता से घबराए अंग्रेजों ने सन 1942 में उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया था और तमाम यातनाएं दीं थीं। फिर बाद में गंभीर हालत में ट्रेन में बैठाकर वापस भेज दिया था। लेकिन वे उपचार कराकर कुछ दिनों बाद फिर से आंदोलन में सक्रिय हो गए थे।
23 वर्ष की आयु में गांधी आश्रम से जुड़े सुखबीर सिंह सन 1985 तक गांधी आश्रम के संचालक के पद पर रहे। सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली थी। मंगलवार को उनके अंतिम दर्शनों के लिए उनके निवास स्थान पर भारी संख्या में शहरवासी पहुंचे। सूरजकुंड पर उन्हें अंतिम विदाई देने वालों में एडीएम सिटी मुकेश चंद्र, एसपी सिटी श्रीप्रकाश द्धिवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह, पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दयानंद गुप्ता, भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग, मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहिताश्व अग्रवालसांसद प्रतिनिधि हर्ष गोयल, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार किशनी, भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अरुण वशिष्ठ के साथ ही शहर के अनेक उद्योगपति, व्यापारी, शिक्षाविद तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।