जिला स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय अनियमितताएं और घोटाला बाएं हाथ का खेल हो गया है। हर हेल्थ स्कीम का टेंडर अपनी पसंदीदा कंपनियों को दिया जा रहा है। ऑडिट में इसकी एक के बाद एक परतें खुल रही हैं। हैरत की बात यह है कि आडिट ऑब्जेक्शन के आधार पर एक्शन हो तो कई बड़े अधिकारियों की गर्दन नप जाएगी। लेकिन शासन तक इसकी गूंज होने के बावजूद मामला कागजी कार्यवाही तक ही सिमट रहा है।
ऑडिट में सामने आ रहा है कि स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर हर छोटे-बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रम के सहारे मोटा पैसा कमाया जा रहा है। सरकार की योजनाओं को चूना लगाने के लिए वॉल पेंटिंग से लेकर स्वास्थ्य प्रोग्राम की प्रचार सामग्री छपवाने में भारी घालमेल किया गया है। यही नहीं, ऑडिट टीम ने स्वास्थ्य केंद्रों पर लगाई गई टैक्सियों के संचालन में भी धांधली पकड़ी है। बिना गाड़ी चले ही व्यापक भुगतान किया गया है। सूत्रों के अनुसार ऑडिट टीम ने सवाल किया है कि जब निरीक्षण ही नहीं किये गए तो फिर टैक्सी का भुगतान कैसे किया गया।
हवा में हो गया निरीक्षण
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत सीएचसी को एक टैक्सी दी गई है। ताकि पीएचसी से लेकर हेल्थ पोस्ट पर निरीक्षण किया जा सके। स्वास्थ्य योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार भी हो। जब रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो माह में चुनिंदा निरीक्षण ही हुए। लेकिन टैक्सी के खर्च में रोजाना निरीक्षण दिखाया गया। इसी तरह से पल्सपोलियो अभियान में बढ़ा-चढ़कर टैक्सी की संख्या दिखाई गई। जिसको लेकर ऑडिट टीम ने जवाब मांग लिया है।
शासन वाकिफ, कार्यवाही सिफर
बीते साल अप्रैल से लेकर अब तक अनियमितताओं की निष्पक्ष तरीके से जांच हो तो बहुत अधिकारी इसकी लपेट में आ जाएंगे। क्योंकि घोटाले को लेकर ही पूर्व में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंस में मौजूद मेरठ के चिकित्सा अधिकारी को कड़ी फटकार लगाते हुए यहां तक कह दिया था कि तुम्हारी भर्तियां पूरे साल चलती है और तुम जेल जाओगे। सिस्टम पर भी सवाल खड़ा होता है। क्योंकि मेरठ में जो कुछ हो रहा है, उससे शासन तक वाकिफ है। लेकिन एक्शन के नाम पर मामला सिफर ही है।
ऑडिट टीम को मनाने की कोशिश
घोटाले की खबरें बाहर आते ही अब स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी ऑडिट टीम को मनाने की कोशिशों में लगे हैं, ताकि रिपोर्ट सही दे दी जाए। जबकि स्वास्थ्य विभाग दो करोड़ रुपये की खरीद बिना डीएम व जिला स्वास्थ्य विभाग की स्वीकृति के करने के सवाल पर ऑडिट टीम को बृहस्पतिवार को जवाब नहीं दे पाया है। अगर सीएमओ कार्यालय संतोषजनक जवाब नहीं देता है तो इसकी रिपोर्ट शासन को जाएगी।