उन्होंने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है और प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार धर्म अपनाने की स्वतंत्रता है। लेकिन यह स्वतंत्रता तभी तक मान्य है, जब तक उसमें किसी प्रकार का लालच, दबाव या धोखे का तत्व शामिल न हो।
संवैधानिक अधिकारों का पालन जरूरी
भराला ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग को दिए गए संवैधानिक अधिकार ऐतिहासिक सामाजिक विषमताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन करता है तो उसकी सामाजिक स्थिति में बदलाव आता है, ऐसे में उससे संबंधित नियमों का पालन होना आवश्यक है। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे समाज में पारदर्शिता, विश्वास और समानता को बढ़ावा मिलेगा।