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सब्सिडी के बहाने चीनी मिलों को ही पहुंचाया जा रहा लाभ

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मेरठ। चीनी निर्यात पर केंद्र सरकार की 3500 करोड़ रुपये की सौगात को किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने नकार दिया है। किसानों का कहना है कि उनके नाम पर उन चीनी मिलों को सब्सिडी दी जा रही है, जो किसानों का न तो गन्ना बकाया भुगतान कर रही हैं और न ही बकाये पर ब्याज दे रही हैं। किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिलने जा रहा है। सरकार को गन्ने का भुगतान खरीद के 14 दिन में कराने और देर होने पर 15 फीसदी ब्याज का भुगतान कराने पर जोर देना चाहिए। प्रदेश की चीनी मिलों पर पिछले साल का 3600 करोड़ से ज्यादा बकाया है।
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बुधवार को तीन कृषि कानूनों के विरोध के बीच केंद्र ने चीनी निर्यात पर सब्सिडी देने का एलान किया था। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजबीर सिंह जादौन और प्रदेश प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय रॉ शुगर का दाम 2400 रुपये और रिफाइंड शुगर का दाम 3200 रुपये क्विंटल है। रॉ शुगर और रिफाइंड शुगर के दामों के बीच के अंतर 800 रुपये प्रति कुंतल की सब्सिडी केंद्र सरकार ने मिलों को देने की घोषणा की है। चीनी मिलों ने इससे पहले मिली सब्सिडी के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं किया है।
रालोद के प्रदेश महामंत्री डॉ. राजकुमार सांगवान और क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह ने भी इसे केवल जुमला करार दिया है। सांगवान का कहना है कि एथनॉल का रेट भी सरकार ने किसानों को फायदा मिलने की बात कहकर बढ़ाया था। इसका फायदा चीनी मिलों को ही मिला। किसानों को उनका गन्ना मूल्य बकाया भी नहीं दिया। इस साल का पेमेंट भी मिलों ने चालू नहीं किया है। सपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह ने भी इसे किसानों के नाम पर शुगर इंडस्ट्री को लाभ देने वाली घोषणा करार दिया।
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किसानों के खाते में 700 रुपये ही जाएगा
केंद्र सरकार की 3500 करोड़ रुपये की चीनी निर्यात सब्सिडी लेने के बाद अगर चीनी मिलें गन्ने का भुगतान करें तो पांच करोड़ किसानों के खाते में केवल 700 रुपये ही गन्ना मूल्य भुगतान के रूप में जाएगा।
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