सरकारी शिक्षा को लेकर सरकारी तंत्र कितना गंभीर है, इसका उदाहरण इस सत्र में साफ नजर आ रहा है। एक अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन कक्षा एक से कक्षा आठ तक मिलने वाली नि:शुल्क किताबों का कुछ अता पता नहीं है। ऐसे में इस बार भी अगस्त से किताबों के वितरण होने की बात कही जा रही है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा एक से कक्षा आठ तक नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान है। योजना के तहत बच्चों को नि:शुल्क किताबें भी दी जाती हैं। दो साल पहले तक जुलाई में नया शिक्षण सत्र शुरू होता था, लेकिन सर्व शिक्षा अभियान के तहत अब सभी स्कूलों में सीबीएसई और आईसीएसई की तर्ज पर एक अप्रैल से नया शिक्षण सत्र शुरू हो रहा है।
मेरठ में 1516 बेसिक शिक्षा परिषद के सरकारी स्कूल, तीन सौ से ज्यादा परिषदीय मान्यता प्राप्त स्कूल और तीन से ज्यादा माध्यमिक शिक्षा परिषद के वित्तीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूल हैं। इन स्कूलों में कक्षा एक से कक्षा आठ तक डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। जिन्हें सरकार की तरफ से नि:शुल्क किताबें दी जाती हैं। पूर्व में ये किताबें जुलाई में सत्र शुरू होने के बाद अगस्त में आना शुरू होती थी और सितंबर माह तक बंट जाती थी।
चूंकि अब शिक्षण सत्र अप्रैल में शुरू हो जाता है तो ऐसे में किताबें अप्रैल में ही मिलनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। विभागीय सूत्राें की मानें तो शिक्षण सत्र भले ही शुरू हो गया हो, लेकिन शासन स्तर से अभी तक प्रकाशक तय नहीं किये गये हैं। ऐसे में तय है कि शिक्षण सत्र भले ही दो माह पहले शुरू हो गया हो, लेकिन किताबें इस बार भी अगस्त-सितंबर में ही मिलेंगी।
शिक्षा के प्रति सरकार घोर लापरवाह है। स्कूलों में बगैर किताबों के भारी दिक्कत हो रही है। सत्र को देखते हुए मार्च अंत तक स्कूलों में किताबें आ जानी चाहिए थी। इस मामले में प्रधानाचार्य परिषद् की तरफ से मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी जाएगी। - डॉ. वीर बहादुर सिंह, अध्यक्ष प्रधानाचार्य परिषद्
कक्षा एक को छोड़कर बाकी सभी कक्षाओं के छात्रों की संख्या शासन को भेज दी जाती है। अभी तक किताबें नहीं आई हैं। जैसे ही आएंगी, तुरंत उनका वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
- मोहम्मद इकबाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी