फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं आ रहे विद्यार्थी, ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी चल रहीं कक्षाएं

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। चौधरी चरण सिंह कैंपस और कॉलेज में कक्षाएं चलते हुए 11 दिन बीत चुके हैं, लेकिन महज 10 से 20 फीसदी विद्यार्थी ही कक्षाओं में आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए विद्यार्थी अभी कॉलेज आने से बच रहे हैं, ऐसे में कॉलेजों को ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई भी करवानी पड़ रही है।
विज्ञापन

मेरठ कॉलेज, एनएएस, डीएन, आरजी, इस्माईल, कनोहर लाल और शहीद मंगलपांडे कॉलेज में चल रही कक्षाओं में छात्र-छात्राओं की संख्या कक्षाओं में बहुत कम है। आरजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. दीपशिखा का कहना है कि 10 से 15 फीसदी ही छात्राएं आ रही हैं। जो छात्राएं नहीं आ रही हैं उनको वाट्सएप ग्रुप बनाकर पढ़ाया जा रहा है।
कनोहरलाल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. किरन प्रदीप ने बताया कि इस तरह से टाइम टेबल बनाया गया है भौतिक रूप से चल रही कक्षाओं के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई भी करवाई जा रही है। इस्माईल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. नीलिमा के मुताबिक जो छात्राएं आती हैं उनको ऑफलाइन पढ़ाया जा रहा है, लेकिन ज्यादा कक्षाएं ऑनलाइन चलाई जा रही हैं।
विज्ञापन

उधर शहीद मंगलपांडे डिग्री कॉलेज में भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां के प्राचार्य डॉ. दिनेश ने बताया कि ऑफलाइन और ऑनलाइन कक्षाएं लगातार जारी हैं। मेरठ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. युद्घवीर सिंह का भी कहना है कि कई विभागों में तय किया जा रहा है कि जिस समय वे ऑफलाइन कक्षाओं में पढ़ाएं उसी समय ऑनलाइन कक्षा का टाइम टेबिल जारी कर दें।
एनएएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीपी राकेश का कहना है कि कम ही छात्र-छात्राएं आ रहे हैं, ऐसे में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरह से कक्षाएं चलाई जा रही हैं। डीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस यादव ने बताया कि ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरह से पढ़ाई करा रहे हैं।
दूसरी तरफ कैंपस में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति आमतौर पर 90 फीसदी तक रहती है, लेकिन यहां भी गिनती के छात्र-छात्राएं ही आ रहे हैं। चीफ प्रॉक्टर वीरपाल सिंह का कहना है कि साइंस और दूसरे प्रैक्टिकल वाले छात्र-छात्राओं के लिए ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई पूरी नहीं हो सकती है, ऐसे में इन्हीं विषयों के छात्र ज्यादा आ रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई ही ज्यादा हो रही है। जो कक्षा में आते हैं, उनको भौतिक रूप से पढ़ाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें