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हर खेमे में मजबूत दावेदार, आरक्षण का है इंतजार

Thu, 04 May 2017 11:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर निगम चुनाव का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। वार्ड परिसीमन के बाद अब सबकी नजर आरक्षण पर टिकी है। लेकिन महानगर में कई खेमों में बंट चुकी भाजपा में हर खेमे के पास मजबूत दावेदार मौजूद हैं। ऐसे में जहां खेमा बंदी को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा, वहीं महापौर पद के साथ ही पार्षद पद की दावेदारी में भी जमकर गुटबाजी नजर आएगी।
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भाजपा पिछले पांच सालों से मुख्य रूप से तीन खेमों में बंटी है, लेकिन इस समय चार खेमे नजर आ रहे हैं। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल और पूर्व विधायक अमित अग्रवाल के खेमे हैं। चारों का ही महानगर की राजनीति में गहरा दखल है। नगर निगम चुनाव में सभी अपने खास कार्यकर्ताओं और नेताओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पार्षद का टिकट दिलाने की कवायद में होंगे तो महापौर पद पर भी अपने ही चहेते को लाने की कवायद होगी।
इस खेमा बंदी की बात करें तो सांसद खेमे से सामान्य सीट पर अजय गुप्ता नटराज, वाजपेयी खेमे से सुरेश जैन रितुराज, अमित अग्रवाल खेमे से अमित अग्रवाल खुद और सत्यप्रकाश अग्रवाल खेमे से नीरज मित्तल और संजीव गुप्ता दावेदारी में है। वहीं बड़े नामों में विनीत अग्रवाल शारदा और संयुक्त व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष बिजेंद्र अग्रवाल और क्षेत्रीय मंत्री संजीव जैन सिक्का भी महापौर के लिए दावेदारी में हैं। लेकिन इनके बीच कुछ नाम ऐसे भी हैं जो बिना किसी गुटबाजी के संघ परिवार, संगठन और इन चारो खेमों में पैठ के चलते अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। इनमें पूर्व महानगर महामंत्री मुकेश सिंघल और महानगर उपाध्यक्ष ललित नागदेव की दावेदारी प्रमुख मानी जा रही है। जबकि वर्तमान महापौर भी गुटबाजी से दूर दावेदारी में बने हैं। 
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पार्षद में नयों को मिलेगा मौका 
भाजपा इस बार नगर निकाय चुनाव दिल्ली की तर्ज पर लड़ेगी। जिस तरह दिल्ली में एक भी पुराने पार्षद या उसके पति या पत्नी को मौका नहीं दिया गया। इसी तरह की नीति यहां भी अपनाने पर चर्चा हो रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार किसी भी पुराने पार्षद को इस बार रिपीट नहीं किया जाएगा। यही नहीं यदि कोई सीट इस बार महिला के लिए आरक्षित हो जाती है तो वर्तमान पार्षद की पत्नी को या पुरुष सीट होने पर वर्तमान महिला पार्षद के पति को भी प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा।
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