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स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक पर 1.35 लाख रुपये का जुर्माना

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने होम लोन करने के दौरान मां-बेटे का बीमा करने में लापरवाही और मां की मौत के बाद बीमा क्लेम नहीं देने पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला बुढ़ाना रोड (स्टेट बैंक) शाखा शामली पर अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही पीड़ित को 35 हजार रुपये अदा करने का आदेश दिया है।
ऊन क्षेत्र के गांव ढिंढाली हाल निवासी काकानगर शामली निवासी यशभाल और वंशभाल (नाबालिग) पुत्र अंशुल कुमार ने आयोग में साल 2018 में परिवाद दायर किया था। एसबीआई पटियाला हाल एसबीआई बुढ़ाना रोड शामली और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को विपक्षी बनाया गया। परिवाद में बताया था कि उनकी दादी संतोष के नाम एक प्लाॅट काकानगर शामली में है। इस प्लाॅट पर होम लोन के लिए परिवादियों ने बैंक से संपर्क किया। बैंक ने सभी कागजी कार्रवाई करते हुए दादी संतोष और पिता अंशुल का संयुक्त खाता खोलते हुए होम लोन पास कर दिया। इसमें उनके पिता अंशुल व दादा सुरेंद्र को ऋण में गारंटर बनाया गया है। बैंक ने दादी संतोष और पिता अंशुल का बीमा ऋण रक्षा पॉलिसी के तहत अपनी बैंक की बीमा कंपनी से बीमा कर दिया जिसका प्रीमियम दादी के खाते से काटा गया। 16 मार्च 2018 को ब्रेम हेमरेज के कारण संतोष देवी का निधन हो गया। जिसकी सूचना पंजीकृत डाक से 13 अप्रैल 2018 को बैंक दे दी गई क्योंकि ऋण दादी के नाम था, तो बीमा पॉलिसी के तहत ऋण माफ करने का अनुरोध किया गया, लेकिन बैंक वाले टालमटोल करते रहे।
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पांच मई 2018 को सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई सूचना में उन्हें जानकारी हुई कि बैंक के लापरवाही करते हुए पिता अंशुल कुमार के नाम बीमा किया था और दादी को नॉमिनी बनाया। साथ ही बीमा को दुर्घटना बीमा योजना के तहत किया गया था। इसके बाद बैंक ने दादी से लोन की रकम 14 लाख 15 हजार 166 रुपये एवं ब्याज की रकम वसूली के लिए नोटिस भेजा। लोन तो चुका दिया गया, लेकिन बैंक व बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता और सदस्य अभिनव अग्रवाल ने परिवाद स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि बैंक और बीमा कंपनी के कारण परिवादी को अदा करने के लिए बैंक शाखा शामली आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार व वाद व्यय 10 हजार आयोग में जमा करें। इसके अलावा सेवा में की गई कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
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