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स्टांप घोटाला : ईओडब्ल्यू की जांच शुरू, दस्तावेज लेकर कार्रवाई की तैयारी

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मेरठ। स्टांप घोटाला में ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी है। रजिस्ट्री विभाग से दस्तावेज लेकर विभागीय अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। बताया गया कि पांच साल की रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप निकलने का सिलसिला अभी जारी है। 1500 से अधिक रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप निकलने की पुष्टि हो चुकी है। इसकी शासन को जांच रिपोर्ट भेजी गई है। इस प्रकरण में विभागीय अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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तीन साल की विभागीय जांच में 998 फर्जी स्टांप होने पर सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें 7.50 करोड़ रुपये का राजस्व चोरी होने की पुष्टि हुई है। स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने तीन साल से बढ़ाकर पांच साल की रजिस्ट्री में फर्जी स्टांप की जांच कराने के निर्देश दिए थे। बढ़े हुए इन दो साल की जांच में भी करीब 515 फर्जी स्टांप निकले हैं। इसमें मुकदमा दर्ज कराने के लिए रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों ने शासन से अनुमति मांगी हुई है। अनुमान है कि करीब 10 साल से फर्जी स्टांप लगाकर रजिस्ट्री होने का सिलसिला मेरठ में चल रहा था। इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी मेरठ विपिन ताडा ने ईओडब्ल्यू से जांच कराने का पत्र लिखा था। ईओडब्ल्यू ने स्टांप घोटाले की जांच शुरू कर दी। मेरठ के छह उपनिबंधकों के बयान लिए हैं। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने रजिस्ट्री विभाग से दस्तावेज मांगे हैं, इस पर आगे की जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य आरोपी विशाल वर्मा कई माह से जेल में बंद हैं, जबकि अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
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