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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: एसएसपी नितिन तिवारी बोले, अपराधियों को उन्हीं के तरीके से मिलेगा जवाब 

Sun, 03 Mar 2019 12:44 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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ssp meerut nitin tiwari
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कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराध को नियंत्रण में रखना व ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना पुलिस अधिकारियों के सामने बड़ी चुनौतियां होती हैं। लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बज चुका है। ऐसे में नवागत आईपीएस अधिकारी नितिन तिवारी ने मेरठ की कमान संभाली है।

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‘अमर उजाला’ के मंच पर एसएसपी नितिन तिवारी ने विभिन्न सवालों के जवाब देते हुए कहा कि अपराधियों को उनके तरीके से ही पुलिस जवाब देगी। लोगों का पुलिस पर भरोसा कायम रखा जाएगा। पुलिस विभाग और हाईटेक होगा तो साइबर अपराध पर शिकंजा कसा जाएगा। महानगर को ट्रैफिक जाम से मुक्त करने के लिए स्पेशल प्लान पर काम होगा।

नाम : नितिन तिवारी 
पिता : राजेंद्र तिवारी (रिटायर्ड पुलिस अधिकारी) 
माता: पद्मा तिवारी (गृहणी)
पत्नी : दीपिका तिवारी (आईपीएस, पोस्टिंग : कमांडेंट पीएसी आगरा) 
पता : ग्वालियर 
शिक्षा : सेंट फ्रांसिस नागपुर से इंटर, बीटेक आईआईटी दिल्ली 
आईपीएस बैच : 2007 
शौक : क्रिकेट खेलना और   स्टडी करना 
संतान : एक बेटा और एक बेटी 

आपकी क्या प्राथमिकता है। क्राइम कंट्रोल के लिए क्या प्लानिंग होगी?
ई-पुलिसिंग और महिलाओं के प्रति अपराध पर अंकुश लगाना प्राथमिकता है। अपराध का ट्रेंड बदल गया है। अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए उन्हें श्रेणियों में बांटा गया है। हर श्रेणी के अपराधी को उसी के तरीके से पुलिस जवाब देगी। गुंडा और गैंगेस्टर एक्ट के साथ रासुका लगाया जाएगा। अपराधियों पर इनाम घोषित कर पुलिस को गिरफ्तारी का टास्क सौंपा जाएगा।

यहां चेन और स्नैचिंग की घटनाएं आम हैं। महिलाओं के प्रति अपराध पर कैसे अंकुश लगाएंगे? 
महिलाओं में जागरूकता होनी चाहिए। महिलाओं से जुड़े अपराध की जानकारी खुद महिलाओं को देनी चाहिए। 1090 व 100 नंबर पर महिलाएं सीधे शिकायत करें। पुलिस तत्काल एक्शन लेगी। महिलाओं का पहचान गुप्त रखी जाएगी। इसको लेकर महिला संगठनों से भी बातचीत की जाएगी। 

साइबर अपराध का ग्राफ पांच साल में तेजी से बढ़ा है। कैसे होगा इस पर कंट्रोल?
साइबर अपराध का ग्राफ गिराने के लिए पुलिसिंग में बदलाव की जरूरत है। साइबर एक्सपर्ट पुलिसकर्मी लगाए गए है। साइबर मीडिया लैब भी हर जनपद में खुलने की बात चल रही है। उच्च स्तर से काम चल रहा है। पुलिसकर्मियों को लखनऊ में ट्रेनिंग दी जा रही है। 

अपराधी शातिर हो गए हैं। कई वारदातों में पुलिस अपराधियों को पकड़ने में नाकाम हो जाती है, ऐसा क्यों? 
अब पुलिस हाईटेक हो गई है। अपराधी कितना भी शातिर हो, पुलिस से नहीं बच पाएगा। कई मामलों में समय जरूर लगता है, लेकिन अपराधी पकड़ा जाता है। शहर के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लेंगे है। सर्विलांस सिस्टम भी एक्टिव है। यूपी-100 और फैंटम पुलिस को भी जिम्मेदारी दी गई है। बीट कांस्टेबल भी अपने इलाके में संदिग्ध अपराधियों पर नजर रखेंगे। 

चुनावी सीजन में शरारती तत्व छोटी-छोटी घटनाओं को तूल देने का प्रयास करते है, उन पर कैसे कंट्रोल करेंगे? 
मेरठ संवेदनशील शहर है। शहर के जिम्मेदार और गण्यमान्य लोगों के साथ ही सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाएगा। इसी जन सहयोग से शरारती तत्वों पर शिकंजा कसेंगे। घटना छोटी हो या बड़ी, पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचेगी। पुलिस का रिस्पांस टाइम बेहतर करेंगे। चुनाव में शरारती तत्वों को कोई मौका नहीं दिया जाएगा। 

शहर रोजाना जाम से जूझता है। दिल्ली रोड पर तो हालात ज्यादा खराब रहते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था कैसे सुधारेंगे?
मेरठ से पहले मैं एसएसपी प्रयागराज था। वहां भी जाम की समस्या रहती थी। वहां कई चौराहों को योजना बनाकर जाम मुक्त किया। यहां भी ऐसा करने का प्रयास  होगा। एसपी ट्रैफिक से इस बाबत जानकारी ली है। शहर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। सड़कों पर अतिक्रमण बहुत है। व्यापारी वर्ग,  बैंक मैनेजरों और अन्य संबंधित पक्षों से वार्ता होगी। पार्किंग व्यवस्था बन जाए तो समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी। अतिक्रमण हटाने के  लिए अभियान चलाएंगे। 
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आतंकियों से जुड़े संदिग्ध लोग मेरठ से भी पकड़े गए हैं। आतंकी इनपुट मिलने पर क्या रणनीति होती है?
सुरक्षा एजेंसियां हर समय अलर्ट  पर रहती हैं। उनके सहयोग में पुलिस तत्पर रहती है। आतंकियों से जुड़े संदिग्ध लोगों के परिजनों पर भी हम नजर रखे हैं। आतंकी इनपुट मिलने के बाद पुलिस रेलवे स्टेशन, बस अड्डे व होटलों में चेकिंग अभियान चलाती है। कांवड़ यात्रा, धार्मिक स्थल व धार्मिक त्यौहारों पर पुलिस एक्टिव रहकर सघन चेकिंग करती है। 

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